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आंगनवाड़ी की तर्ज पर अब स्कूली बच्चों को भी मिलेगी जीविका दीदी की सिली पोशाक, 5 लाख महिलाओं को मिलेगा रोजगार

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 10:39:46 AM

पटना (PATNA): राज्य में आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के बाद अब प्रारंभिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को भी जीविका दीदियों द्वारा सिली हुई पोशाक देने की तैयारी की जा रही है. इसकी घोषणा ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने की. उन्होंने कहा कि इस पहल से न सिर्फ बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोशाक मिलेगी, बल्कि लाखों महिलाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे.

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने रविवार को दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संयुक्त रूप से आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा तैयार पोशाक का वितरण किया. इस दौरान मंत्री श्रवण कुमार ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि इस योजना को स्कूलों तक विस्तार देने के लिए जल्द उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाए, ताकि अंतिम निर्णय लिया जा सके.

कार्यक्रम के दौरान दोनों मंत्रियों ने अलग-अलग केंद्रों पर जाने वाले बच्चों को पोशाक सौंपी. पोशाक पाने वाले बच्चों में आरोही, आदित्य, कार्तिक, खुशी, कृतिका, पीहू, रौशनी, अमन और विवेक सहित कई बच्चे शामिल रहे. पोशाक पाकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए.

ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि वर्तमान में आंगनवाड़ी केंद्रों के करीब 50 लाख बच्चों को जीविका दीदियों द्वारा पोशाक उपलब्ध कराई जा रही है, जिसे मार्च तक सभी बच्चों तक पहुंचा दिया जाएगा. अभी लगभग एक लाख महिलाएं 1050 सिलाई केंद्रों के माध्यम से इस कार्य से जुड़ी हैं. आने वाले समय में यह संख्या बढ़ाकर 5 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने के संकल्प को मजबूती प्रदान करेगी.

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि वर्ष 2006 में विश्व बैंक के सहयोग से शुरू हुई जीविका आज राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही है. वर्तमान में 11 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं.

समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा और रोजाना दूध दिया जा रहा है. पोशाक मिलने से बच्चों में एकरूपता आएगी. उन्होंने आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से बच्चों के पोषण और देखभाल पर विशेष ध्यान देने की अपील की.

ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि पोशाक सीधे उपलब्ध कराने से राशि के दुरुपयोग की संभावना खत्म होगी और बच्चों को बेहतर गुणवत्ता की पोशाक मिलेगी. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने बताया कि कम समय में जीविका दीदियों ने 50 लाख बच्चों के लिए पोशाक तैयार की है. मार्च तक सभी आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों को पोशाक उपलब्ध करा दी जाएगी. प्रत्येक बच्चे को साल में दो पोशाक देने की योजना है. उन्होंने बताया कि राज्य के 490 आंगनवाड़ी केंद्रों को पालना घर में बदला गया है, जहां शाम 5 बजे तक कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल की जाती है.

कार्यक्रम में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने बताया कि अभी पोशाक निर्माण से लगभग एक लाख महिलाओं को रोजगार मिल रहा है. राज्य के 15 जिलों में 1050 सिलाई केंद्रों के माध्यम से पोशाक तैयार की जा रही है. इस अवसर पर स्टिच मॉनिटरिंग सिस्टम मोबाइल ऐप, सॉफ्टवेयर और सिलाई प्रशिक्षण एवं उत्पादन पुस्तिका का भी विमोचन किया गया. कार्यक्रम में आईसीडीएस निदेशक योगेश कुमार सागर समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

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