पटना(PATNA): उत्तर बिहार का कई इलाका बरसात के समय मानो किसी टापू पर शिफ्ट हो जाता है.बाढ़ से अधिकतर इलाके में आवागमन महीनों बंद रहता है. लेकिन अब नाबार्ड योजना के तहत टापू बनने वाले इलाकों की मैपिंग कर नदी पर ग्रामीण पूल का जाल बिछाए जाने का काम शुरू कर दिया गया. जिससे कोसी, गंडक, बागमती और कमला जैसी सदानीरा नदियों के किनारे बसे गाँव अब टापू नहीं बनेंगे.
नाबार्ड योजना के तहत उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलों में पुल निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है. इस दिशा में पूर्वी चंपारण जिले में सर्वाधिक 50 ग्रामीण पुलों का निर्माण किया जा चुका है. वहीं, हर साल बाढ़ की मार झेलने वाले दरभंगा जिले में यातायात को सुगम और बाधारहित बनाने के लिए कुल 74 पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 54 ग्रामीण पुल बनकर तैयार हो चुके हैं. भौगोलिक दृष्टिकोण से संवेदनशील सीतामढ़ी जिले में कुल 44 पुलों और मधुबनी जिले में 55 पुलों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, समस्तीपुर जिले में भी 58 पुलों का निर्माण कर संपर्कता सुदृढ़ की गई है, ताकि कोई भी गांव संपर्कता से वंचित न रहे.
ग्रामीण कार्य विभाग की तरफ से नाबार्ड की मदद से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बारहमासी संपर्कता प्रदान करने के लिए तेजी से कार्य किये जा रहे हैं. पूर्व में इन इलाकों में हल्की सी बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ने पर आवागमन का एकमात्र सहारा छोटी और असुरक्षित नावें हुआ करती थी. बाढ़ के दौरान इन ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट जाता था. लेकिन अब इन पुलों का निर्माण होने से व्यापक परिवर्तन आया है. इन पुलों के निर्माण से उत्तर बिहार के सुदूर गांवों को बारहमासी सड़क संपर्कता प्राप्त हुई है, जिससे इन गांवों के विकास की रफ्तार भी तेज हुई है.