पटना : बिहार में अब पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज़ होने जा रहा है. राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए गैस कंपनियों को अनुमति देने की प्रक्रिया को सिर्फ 24 घंटे में पूरा करने का निर्देश दिया है.
उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कहा है कि PNG के विस्तार में अब किसी तरह की प्रशासनिक देरी बर्दाश्त नहीं होगी. अगर नगर निकाय 24 घंटे के भीतर अनुमति जारी नहीं करते हैं, तो वह स्वतः ही मंजूर मानी जाएगी. यानी अब फाइलें नहीं अटकेंगी, काम सीधे जमीन पर दिखेगा. कहां तक पहुंची PNG सेवा?
फिलहाल राज्य के 18 जिला मुख्यालय,पटना, गया, नालंदा, बेगुसराय, शेखपुरा, जमुई, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, लखीसराय, मुंगेर, सहरसा, मधेपुरा, भोजपुर, पूर्णियां, औरंगाबाद और रोहतास में PNG की बुनियादी व्यवस्था तैयार है. इन जिलों में करीब 1 लाख घरों तक पाइप के जरिए रसोई गैस पहुंच रही है.
24 घंटे में कनेक्शन, 1 हफ्ते में 70 हजार उपभोक्ता!
गैस वितरण कंपनियों का दावा है कि वे 75 हजार से ज्यादा घरेलू कनेक्शन सिर्फ 24 घंटे में देने की क्षमता रखती हैं. वहीं, एक सप्ताह के भीतर 70 हजार नए उपभोक्ताओं को PNG से जोड़ा जा सकता है.
सिर्फ घरेलू ही नहीं, बल्कि सैकड़ों व्यवसायिक प्रतिष्ठान और कई औद्योगिक इकाइयां भी PNG का इस्तेमाल कर रही हैं.
LPG से क्यों बेहतर है PNG?
सरकार का जोर PNG को बढ़ावा देने पर इसलिए है क्योंकि यह:
- ज्यादा सस्ती है
- सुरक्षित है
- लगातार सप्लाई मिलती है
- और अधिकतर देश के भीतर उपलब्ध है
यानी उपभोक्ताओं को बिना सिलेंडर के झंझट के आसान और भरोसेमंद गैस मिलेगी.
क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए?
- गैस पाइपलाइन या प्लांट लगाने की अनुमति 24 घंटे में अनिवार्य
- देरी होने पर अनुमति ऑटोमेटिक मंजूर मानी जाएगी
- कंपनियां अपने खर्च पर सड़क/ढांचे की मरम्मत करेंगी, फिर भी तुरंत अनुमति मिलेगी
- सरकारी गैस कंपनियों को जमीन सांकेतिक दर पर तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी
- कंपनियों को 24×7 काम करने की छूट, ताकि प्रोजेक्ट तेजी से पूरे होंबाकी जिलों में भी जल्द पहुंचेगा PNG
जिन जिलों में अभी PNG नहीं पहुंचा है,जैसे बांका, गोपालगंज, सीवान, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सीतामढ़ी, शिवहर, नवादा, भागलपुर, खगड़िया, अरवल, जहानाबाद, बक्सर, अररिया, कटिहार, किशनगंज और कैमूर, वहां भी तेजी से काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकार ने नगर निकायों और तेल कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर समयबद्ध तरीके से मंजूरी देने पर जोर दिया है. क्या है इसका मतलब?
सरकार के इस फैसले के बाद अब PNG कनेक्शन लेना आसान ही नहीं, बल्कि बेहद तेज़ भी हो जाएगा. इससे न सिर्फ लोगों को सस्ती और सुरक्षित गैस मिलेगी, बल्कि राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा.