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बिहार में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नया नियम, ₹50 करोड़ से अधिक की योजनाओं में जियो-स्पैशियल मंजूरी होगी जरूरी

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
January 14, 2026
Updated 5:36 pm

पटना (PATNA): राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC) द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा, सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव मौजूद रहे.

बैठक में विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से BIRSAC की वर्तमान गतिविधियों की जानकारी दी. बताया गया कि BIRSAC राज्य में प्राकृतिक संसाधनों और विभागीय परिसंपत्तियों का जियो-स्पैशियल इन्वेंट्री निर्माण, राज्य स्तरीय योजना एवं विकास कार्यों के लिए स्पैशियल डेटा उपलब्ध कराने, आपदा निगरानी व प्रबंधन तथा ग्राम स्तर पर जियो-स्पैशियल डेटाबेस तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है.

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी विभागों को BIRSAC की जियो-स्पैशियल सेवाओं का व्यापक और व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की जियो-स्पैशियल सेवा उपयोग नीति के तहत ₹50 करोड़ या उससे अधिक लागत की अवसंरचना परियोजनाओं के DPR में जियो-स्पैशियल एनालिटिक्स को अनिवार्य ऐड-ऑन के रूप में शामिल किया गया है. इसके लिए संबंधित विभाग को कुल परियोजना लागत का मात्र 0.25 प्रतिशत शुल्क देना होगा, जिससे संस्थान की वित्तीय क्षमता मजबूत होगी और राज्य पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा.

मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य में अवसंरचना विकास को वैज्ञानिक, डेटा-आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए BIRSAC की सेवाओं का उपयोग अब वैकल्पिक नहीं बल्कि आवश्यक है. उन्होंने निर्देश दिया कि योजना निर्माण के शुरुआती चरण में ही जियो-स्पैशियल इनपुट को शामिल किया जाए, ताकि आगे तकनीकी, प्रशासनिक और भूमि से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सके.

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब ₹50 करोड़ से अधिक लागत की सभी अवसंरचना परियोजनाओं के DPR को वित्तीय स्वीकृति से पहले BIRSAC से तकनीकी अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा. सभी विभागों को इस व्यवस्था का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए.

विभागीय सचिव ने बताया कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से DPR निर्माण के लिए एक डिजिटल टूल विकसित किया जा रहा है. यह टूल PM गति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागों के डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना, अलाइनमेंट और आकलन को अधिक सटीक बनाएगा.

बैठक में उपस्थित विभागों ने माना कि इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति रुकेगी, लागत में बचत होगी और सड़क अलाइनमेंट जैसी परियोजनाओं में भूमि, वन, क्रॉस ड्रेनेज जैसी संभावित बाधाओं की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सकेगी. यह प्रणाली आपदा प्रबंधन और पराली जलाने जैसी गतिविधियों की निगरानी में भी सहायक साबित होगी.

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को पोर्टल पर परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित अद्यतन जानकारी नियमित रूप से साझा करने और अंतर-विभागीय समन्वय को और मजबूत करने का निर्देश दिया. उन्होंने BIRSAC के कार्यों की सराहना करते हुए संस्थान को तकनीकी और मानव संसाधन स्तर पर और सशक्त बनाने पर भी जोर दिया.

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