भागलपुर(BHAGALPUR):भागलपुर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए वीर जवान नीरज कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव सबौर प्रखंड के मिर्जापुर पहुंचा, पूरा इलाका शोक और गर्व के भाव से भर उठा.गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था, लेकिन हर घर से निकलकर लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े.
सड़क दुर्घटना में हुई मौत
शहीद जवान एएमसी नीरज कुमार के परिजनो ने बताया कि वे भोपाल के आर्मी अस्पताल में भर्ती थे वहां उनका आपरेशन किया गया इसी दौरान उनकी हालत नाजुक हो गई और वे शहीद हो गए, वही शहीद के शव के साथ आये कर्नल योगेन्द्र ने बताया कि ड्यूटी के दौरान नीरज एक जगह से दूसरी जगह जा रहा था तभी उसका ऐक्सिडेंट हो गया चूंकि भागलपुर के इस अनमोल लाल ने अपने कार्यकाल में अच्छा प्रदर्शन किया था इसलिए उसे शहीद जवान की श्रेणी प्राप्त हुई.
तिरंगे में लिपटे वीर सपूत का हुआ भव्य स्वागत
जैसे ही सेना के जवानों का काफिला गांव में दाखिल हुआ, लोगों की भारी भीड़ सड़कों पर उमड़ आई.हर कोई अपने लाल की अंतिम झलक पाने को बेताब नजर आया. तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को जब उनके घर के आंगन में लाया गया, तो “भारत माता की जय” और “वीर जवान अमर रहे” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। यह दृश्य हर किसी की आंखों को नम कर देने वाला था.
परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल, बच्चों को नहीं समझ आ रहा दर्द
शहीद नीरज कुमार के घर पर मातम पसरा हुआ था.मां अपने बेटे के वियोग में बार-बार बेहोश हो जा रही थीं, जबकि पत्नी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.दो छोटे बच्चों को अभी पूरी तरह यह एहसास भी नहीं हो पा रहा था कि उनके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे.भाइयों और अन्य परिजनों का भी रो-रो कर बुरा हाल था.
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम सलामी
सेना के जवानों और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने पूरे सम्मान के साथ शहीद को अंतिम सलामी दी. जवानों ने अपने हथियार झुकाकर अपने साथी को श्रद्धांजलि अर्पित की.इस दौरान सबौर थाना पुलिस और औद्योगिक प्रक्षेत्र जीरो माइल पुलिस भी पूरी व्यवस्था में तैनात रही और अंतिम यात्रा में शामिल हुई.
बचपन से था देश सेवा का जज्बा
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि नीरज कुमार बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत थे.उनका सपना था कि वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें. उन्होंने अपने इस सपने को पूरा किया और अंततः देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए.
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी विदाई
शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचा। पूरे गांव में गम का माहौल था, लेकिन साथ ही अपने बेटे की शहादत पर गर्व भी साफ झलक रहा था. लोगों ने नम आंखों से अपने लाल को विदाई दी और उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया.