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बिहार में डॉक्टर बनने के लिए टैलेंट नहीं पैसे  है जरूरी ! खुलेआम बिक रही है डिग्रीयां, IGIMS में पेपर लीक का रेट कार्ड राज उजागर

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 12, 2026, 12:07:00 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):डॉक्टर का पेशा एक ऐसा काम है, जिसे लोग भगवान का दर्जा देते है. कहा जाता है कि डॉक्टर धरती का भगवान होता है जब किसी की भी हालत खराब होती है और बुरी स्थिति आती है तो सीधे लोग डॉक्टर के पास दौड़ते है लेकिन डॉक्टर बनने के लिए कई साल की मेहनत लगती है. जहां रात-रात भर जगकर आपको कई घंटे पढ़ना पड़ता है.जहां आपको मेहनत के साथ-साथ पैसे भी खर्च करने पड़ते है,लेकिन अगर आप बिहार के निवासी है तो डॉक्टर बनना बेहद आसान है, अब आपको मेहनत की जरूरत नहीं है, क्योंकि यहां डिग्री खुलेआम फल सब्जी की तरह बिक रही है जहां से आप जाकर इसको खरीद सकते है और किसी के भी जीवन से खिलवाड़ कर सकते है.

पढ़े पूरा मामला क्या है 

दरअसल पूरा मामला राजधनी पटना के IGIMS का है.जहां कथित पेपर लीक और धांधली का मामला अब एक बड़े शैक्षणिक घोटाले का रूप लेता दिख रहा है. इस प्रतिष्ठित संस्थान में MBBS और PG फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर लगे आरोपों ने न सिर्फ संस्थान की साख को झटका दिया है, बल्कि पूरे चिकित्सा शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए है.

इस तरह उजागर हुआ मामला 

आपको बता दें कि यह पूरा मामला  11 मार्च 2026 का है.जहां भेजे गए एक कथित ईमेल के वायरल होने के बाद उजागर हुआ. इसमें डीन कार्यालय के एक गैर-शिक्षण कर्मचारी पर गंभीर आरोप लगाए गए कि वह पैसे लेकर चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराता था साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और ‘सेटिंग’ का भी जिक्र किया गया, जिससे यह मामला केवल लीक तक सीमित न रहकर एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है.

पूरा सिस्टम  तय “रेट कार्ड”

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा सिस्टम एक तय “रेट कार्ड” के आधार पर संचालित हो रहा था.पेपर लीक की अलग कीमत और उत्तर लिखवाकर सिस्टम में फिट कराने की अलग डील.लाखों रुपये के इस कथित खेल ने मेडिकल शिक्षा की पारदर्शिता और नैतिकता को गहरी चोट पहुंचाई है.मामले के सामने आने के बाद 17 मार्च को निदेशक कक्ष में बैठक हुई, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर तत्कालीन परीक्षा डीन प्रकाश दुबे ने इस्तीफा दे दिया.इसके बाद डॉ. नीरू गोयल को नई जिम्मेदारी दी गई, लेकिन विवाद थमने के बजाय और गहराता चला गया.

छात्रों में भारी आक्रोश है

छात्रों में भारी आक्रोश है और आंदोलन की चेतावनी दी जा चुकी है.7 अप्रैल को हुई उच्चस्तरीय बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे की अनुपस्थिति ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया. बताया जा रहा है कि वे पहले से ही एक पुराने मामले में CBI जांच के दायरे में हैं, जिससे इस प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है.अंदरखाने की चर्चाओं में परीक्षा शाखा के भीतर सक्रिय एक नेटवर्क की बात सामने आ रही है, जहां पैसे के आधार पर पेपर लीक और कॉपी मैनेजमेंट जैसे काम किए जाते थे. सीसीटीवी फुटेज में असामान्य समय पर संदिग्ध गतिविधियों की बात भी जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है.मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसे सात दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है.

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