बाढ़ (BARH) : अनुमंडल के नवादा, ढीबर और रैली पंचायत में लगाई गई सैंकड़ो एकड़ चुकंदर की फसल का मंडी में उचित दाम नही मिलने से किसान चुकंदर को खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ रहे है. मंडी में चुकंदर की कीमत दो रूपए से पांच रूपए प्रति किलो है.
किसानों के अनुसार नवादा और ढीबर पंचायत में करीब पांच सौ से सात सौ किसानों ने लगभग एक सौ एकड़ जमीन में चुकंदर लगाया गया है लेकिन खरीदार के नहीं आने और मंडी में कम दाम प्रति किलो रहने के कारण किसान चुकंदर को खेत में ही जोतकर दूसरी फसल लग रहे हैं. कुछ किसानों ने पहले से मक्का लगा दिया था जो अब चुकंदर को उखाड़कर खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दिए हैं ताकि मक्का की पैदावार अच्छी हो सके.
इतने कम दाम पर नहीं बेचेंगे चुकंदर
वहीं सैकड़ो किसान चुकंदर उखाड़ कर अपने गाय भैंसों को खिला रहे हैं. किसानों का कहना है कि इतने कम दाम पर वह चुकंदर नहीं बेचेंगे. पिछले साल उन्हें शुरुआत में बीस रूपए प्रति किलो और अंतिम तक में लगभग नौ से दस रूपए प्रति किलो का रेट मिल गया था लेकिन इस बार शुरुआत में सात रुपए प्रति किलो का रेट मिला और अब प्रतिदिन अलग-अलग रेट रहता है लेकिन दो से पांच रूपए प्रति किलो से ज्यादा नहीं मिल पा रहा है.
कम दाम रहने से पूरे फसल को हो रहा है नुकसान
नवादा पंचायत निवासी धर्मवीर कुमार ने कहा कि वह दो बीघा में चुकंदर की खेती किए है जिसमें लगभग दो लाख रुपए लागत आई है. पूरी फसल खेत में ही है कम दाम रहने से पूरा फसल का नुकसान हो रहा है. मंगलवार को मंडी में दो बोरा चुकंदर उखाड़कर ले गए जहां दो रूपए किलो बिका. पिछले साल सही रेट मिल गया था लेकिन इसबार नुकसान झेलना पड़ा. वह पट्टा पर खेती करते है इस नुकसान की भरपाई वह नही कर पाएगे.
इस बार सब्जी की फसल में पूरी तरह नुकसान
मीना देवी ने बताया कि चुकंदर नहीं बिकने के कारण वह इसे छोटे-छोटे टुकड़े कर गाय भैंस को खिला रही हैं कोई खरीददार नहीं आ रहा है. वह दो बीघा में चुकंदर की खेती किए हैं जिसमें लगभग दो लाख रुपए की लागत आई. पिछले एक महीने से चुकंदर खेत में ही है. पूरे दो बीघा में लगी चुकंदर जानवर भी नहीं खा पाएंगे. वह खेत में ही सड़ जाएगा. इस बार सब्जी की फसल में पूरी तरह नुकसान हुआ है.
मंडी ले जाने का भाड़ा और मजदूरी उससे ज्यादा है
राम महतो ने बताया कि वह डेढ बीघा में चुकंदर की खेती किए है. चुकंदर दो से तीन रुपए प्रति किलो मंडी में बिक रहा है. उन्हें उखाड़कर मंडी ले जाने का भाड़ा और मजदूरी उससे ज्यादा है. इस कारण वह मंडी भी नहीं ले जा रहे हैं. इस साल उन्हें बीज और खाद महंगा खरीदना पड़ा जिस कारण लागत ही ज्यादा आई है. उन्होंने लगभग एक बीघा लगी हुई चुकंदर की फसल ट्रैक्टर से जुतवा दी. 15 कट्ठा में मक्का लगा हुआ है इसलिए उखाड़कर खेत में ही छोड़ रहे हैं ताकि वह सड़ जाए.