पटना(PATNA): राज्य सरकार ने सात निश्चय–3.0 की शुरुआत की है.जिसमें पेयजल विभाग को प्राथमिकता में रखा गया है. इसी कड़ी में पेय जल योजनाओं को ससमय पूरा और 24 घंटे में जलापूर्ति संबंधित शिकायत का निवारण करने का लक्ष्य रखा गया है. इसी कड़ी में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा ज्ञान भवन पटना में सभी क्षेत्रीय सहायक अभियंता और कनिय अभियंताओं को प्रशिक्षण किया गया.
बता दे कि प्रबंधन सूचना प्रणाली (मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम – MIS)और केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (सेंट्रलाइज्ड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम – CGRC) से संबंधित एक दिवसीय राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य विभागीय योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना, शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और अभियंताओं की तकनीकी एवं प्रशासनिक क्षमता का संवर्धन करना है.
सात निश्चय–3.0 में पेयजल विभाग को प्राथमिकता
कार्यक्रम में सचिव पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा सात निश्चय–3.0 की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत ईज़ ऑफ़ लिविंग एक प्रमुख स्तंभ है. उन्होंने कहा कि ईज़ ऑफ़ लिविंग के अंतर्गत पेयजल एक अत्यंत संवेदनशील और प्राथमिक विषय है. इसी दृष्टिकोण के अनुरूप विभाग द्वारा आगामी समय में जलापूर्ति से संबंधित अधिकांश शिकायतों का समाधान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है. केवल वही मामले अपवाद होंगे, जिनमें बहुस्तरीय अथवा बड़े अवसंरचनात्मक विकास की आवश्यकता होगी.
पेयजल योजनाओं को ससमय गुणवंतपूर्ण पूरा करने का आदेश
सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देशानुसार सात निश्चय–3.0 के अंतर्गत पेयजल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और शिकायत निवारण व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति में क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत अभियंताओं की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. सीजीआरसी पोर्टल पर शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि जिन संवेदकों के साथ अभियंताओं द्वारा शिकायतों के समाधान में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है, उनके विरुद्ध निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभियंताओं की सराहना भी की गई.
ईज़ ऑफ़ लिविंग विज़न धरातल पर उतारने पर जोर
सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि सरकार के ईज़ ऑफ़ लिविंग विज़न को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से सभी सहायक और कनीय अभियंता अपने-अपने क्षेत्र में संचालित प्रत्येक जलापूर्ति योजना का माह में कम से कम एक बार भौतिक निरीक्षण सुनिश्चित करें तथा उसकी अद्यतन जानकारी अनिवार्य रूप से एमआईएस पोर्टल पर प्रविष्ट करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वही सूचनाएँ मान्य मानी जाएँगी, जो एमआईएस पोर्टल पर उपलब्ध होंगी. इसके अतिरिक्त, सीजीआरसी के अंतर्गत संचालित कॉल सेंटर की क्षमता आगामी महीनों में चरणबद्ध रूप से बढ़ाए जाने की भी जानकारी दी गई, जिससे आमजनों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और अधिक सरल हो सके.
कार्यक्रम के प्रशिक्षण सत्रों का संचालन विशेष सचिव संजीव कुमार द्वारा किया गया. उन्होंने MIS और CGRC से जुड़े विभिन्न प्रक्रियागत और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की. प्रशिक्षण को संवादात्मक स्वरूप में आयोजित किया गया, जिसमें अभियंताओं से सीधे प्रश्न-उत्तर के माध्यम से चर्चा की गई तथा क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का समाधान बताया गया.
प्रशिक्षण के दौरान MIS और CGRC के अतिरिक्त विद्युत देयकों के भुगतान, पंप चालकों के मानदेय, जल स्रोतों की स्थिरता, जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं अनुरक्षण तथा विभागीय समन्वय जैसे विषयों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया. अभियंताओं से प्रत्यक्ष संवाद कर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया, जिससे विभागीय कार्यों के निष्पादन को और अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाया जा सके.
उन्मुखीकरण कार्यक्रम में विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल, विशेष सचिव संजीव कुमार,अपर सचिव अरविंद कुमार, अभियंता प्रमुख-सह-विशेष सचिव नित्यानंद प्रसाद, अभय कुमार एवं विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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