भागलपुर(BHAGALPUR):बिहार में पुलों के ध्वस्त होने की खबरें अब आम होती जा रही है.आए दिन राज्य के अलग-अलग जिलों से पुल गिरने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आती रहती है.ऐसा लगता है कि अब लोगों को भी इन हादसों की आदत सी हो गई है. पुलों की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे है.ताजा मामला भागलपुर जिले से सामने आया है, जहां एक बार फिर पुल की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए है.इस घटना ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर बहस तेज कर दी है.
भागलपुर में फिर उठे गुणवत्ता पर सवाल
बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु का पिलर नंबर 133 अचानक गंगा नदी में धंस गया.इसके साथ ही पुल का एक हिस्सा भी टूटकर गिर गया. राहत की बात यह रही कि समय रहते पुल पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई.जानकारी के अनुसार रात करीब 11:55 बजे पुल में कंपन महसूस हुआ.इसके बाद पुलिसकर्मियों ने तुरंत अधिकारियों को सूचना दी। रात 1:07 बजे के आसपास पुल का स्लैब तेज आवाज के साथ गंगा में गिर गया. आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों तक सुनाई दी.
घटना के बाद प्रशासन अलर्ट
घटना के बाद प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया। रेंज आईजी विवेक कुमार, एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और नवगछिया एसपी ने मौके की स्थिति संभाली.एहतियात के तौर पर घोघा, सबौर और जगदीशपुर में भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई, ताकि शहर में जाम की स्थिति न बने.स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि पुल की लंबे समय से सही तरीके से मरम्मत नहीं हुई थी.करीब एक महीने पहले भी पिलर के पास सुरक्षा दीवार में दरार और खिसकने की बात सामने आई थी, लेकिन समय पर ध्यान नहीं दिया गया. गंगा की तेज धारा लगातार पुल की नींव को कमजोर कर रही थी.
भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ गई है
वर्ष 2001 में शुरू हुआ यह 4.7 किलोमीटर लंबा पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ता है.इस पुल से रोजाना लाखों लोग सफर करते है.अब पुल क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ गई है.पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं और लोग वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेने को मजबूर है.