TNP DESK-| बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को एक अलग किस्म का शोर था. पटना में एक आईजी को गिरफ्तार करने आंध्र प्रदेश पुलिस पूरी तैयारी के साथ पहुंची थी. लेकिन दोपहर के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस की लापरवाही उजागर हो गई. और वह आईजी को ट्रांजिट रिमांड पर नहीं ले जा सकी , आंध्र प्रदेश की पुलिस ने एक पूर्व सांसद को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के मामले में आईजी सुनील नायक को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंची थी. लेकिन आंध्र प्रदेश पुलिस के पास वारंट तक नहीं था. आईजी को अरेस्ट करने की बात जैसे ही सामने आई, पुलिस महकमे में खलबली मच गई. काफी देर तक आंध्र प्रदेश की पुलिस घर के अंदर रही.
थोड़ी देर के बाद खबर सामने आई कि आंध्र प्रदेश की पुलिस ने सुनील नायक को अरेस्ट कर लिया है और अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर साथ ले जाने की तैयारी चल रही है. इस बीच बचाव पक्ष ने कोर्ट की शरण ली. अदालत में यह पता चला कि आंध्र प्रदेश पुलिस बिना वारंट और केस डायरी के ही आईजी को गिरफ्तार करने पटना पहुंच गई थी और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था. पटना सिविल कोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हुई, तो आंध्र प्रदेश पुलिस की पोल खुल गई. सुनील नायक को गिरफ्तार करने के लिए दूसरे राज्य से आई पुलिस के पास जरूरी कागजात नहीं थे. आंध्र प्रदेश की पुलिस कागजात कोर्ट में पेश नहीं कर सकी, बताया जाता है कि कोर्ट ने कहा कि बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किये , किसी वरिष्ठ अधिकारी को ट्रांजिट पर ले जाना संभव नहीं है.
अदालत ने सुनील नायक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी. कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड को भी रिफ्यूज कर दिया। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष की कथित हिरासत में प्रताड़ना से संबंधित केस में बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी सुनील नायक के ठिकाने पर आंध्र प्रदेश की पुलिस टीम पहुंची थी. मामला 2021 का है. जब तत्कालीन सांसद को गिरफ्तार किया गया था. उस समय नायक आंध्र प्रदेश में प्रति नियुक्ति पर थे. जानकारी के अनुसार 2019 में सुनील नायक प्रतिनियुक्ति पर आंध्र प्रदेश गए थे और 2023 में अपने मूल कैडर बिहार लौट आये थे.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
