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बिहार : कृषि मंत्री ने नीतीश कुमार के नए कृषि कानून पर उठाया सवाल, पंजाब से की तुलना

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 11, 2026, 7:50:14 AM

पटना(PATNA): राज्य सरकार के कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत ने आज यानी मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने लालू प्रसाद यादव के सफल किडनी ट्रांसप्लांट पर ख़ुशी व्यक्त की और कहा कि हमारे नेता पूर्ण रूप से स्वस्थ्य होकर जल्द से जल्द हमारे बीच बिहार आएंगे. वहीं, उन्होंने कहा कि मंत्री रहते बिहार की कृषि उत्पादन के आंकड़ों और बिहार के कृषि व्यवस्था के अवलोकन करने का मौका मिला. विभागीय अवलोकन करने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि साल 2006 में निरस्त किए गए बिहार कृषि उपज बाजार अधिनियम के बदले में बिहार में नई कृषि मार्केटिंग या मंडी कानून के नहीं होने से बिहार की कृषि व्यवस्था चरमरा गई है और इसका भयानक प्रतिकूल असर बिहार की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है.

मंत्री ने कहा कि साल 2006 में बिहार में कृषि उपज बाजार समिति (APMC) अधिनियम खत्म करके, इसे एक बड़ा सुधारवादी कदम बिहार सरकार के द्वारा बताया गया था. उस समय नीतीश कुमार को सत्ता संभाले केवल एक साल ही हुआ था, आज लगभग 16 साल बीत चुके हैं. इतने साल बाद भी किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए अनुकूल बाजार नहीं मिल पाया है और किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर निजी व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं.

उन्होंने कहा कि अगर हम बिहार के कृषि आंकड़ों पर नजर डाले और उसकी तुलना कृषि मंडी व्यवस्था वाले पंजाब से करें तो निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं.

1. बिहार में जहां मंडी व्यवस्था कानून समाप्त कर दिया गया है. वहीं, किसानों की आय करीब 54,000 रहा है. वहीं, दूसरी तरफ जहां सबसे प्रभावशाली तरीकों से मंडी कानून पंजाब में कायम है, वहां प्रति व्यक्ति आय 1,62,000 से ज्यादा है.

2. पंजाब में धान की बिक्री मूल्य औसत 2300 रुपये प्रति क्विंटल है. वहीं, बिहार में धान की बिक्री मूल्य औसत 1600 रुपये प्रति क्विटल है, यह विक्री दर का अंतर केवल धान में ही नहीं विभिन्न फसलों में भी स्पष्ट दिखता है.

3. अगर हम सिर्फ धान और गेंहू की बिक्री मूल्य के अंतर को ही देख ले तो पंजाब के मुकाबले बिहार के किसानों को बीस हजार करोड़ रुपए का कम आय हो रहा है, यह अंतर केवल बिक्री पर ही नहीं है बल्कि बिहार के किसानों के कुल उत्पादन में कमी और राज्य सरकार के द्वारा मार्केटिंग में सहयोग नहीं मिलने के कारण भी हो रहा है.

4. बिहार में चावल का औसत उपज लगभग 2200 किलो. प्रति हेक्टेयर का है. वहीं, पंजाब में 4800 किलो प्रति हेक्टेयर का है. इसी तरह का औसत अंतर विभिन्न फसलों में भी देखा जा सकता है.

5. पंजाब और बिहार के उत्पादन और खरीद मूल्य के फर्क के आर्थिक मूल्यांकन की बात करें तो बिहार के किसानों को 90,000 करोड़ प्रति वर्ष का अतिरिक्त नुकसान है जबकि तुल्नात्मक रूप से बिहार की मिट्टी, पानी और कामगार पंजाब के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है. यहां तक कि बिहार पंजाब के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा उर्वरक प्रति हेक्टेयर खपत करता है.

6. सवाल यह उठता है कि पंजाब के मुकाबले बिहार की उत्पादकता 60 प्रतिशत कम क्यों है? उपर वर्णित तथ्यों के आलोक में बिहार सरकार के द्वारा अभी तक 3 कृषि रोड मैप लाए गए, जिन पर तकरीबन 3 लाख 10 हजार करोड़ रूपये खर्च करने के बावजूद उत्पादकता 40 प्रतिशत और आमदनी 70 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है. ऐसी जटिल परिस्थिति में बिहार सरकार को बीज से लेकर बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर नीतिगत बदलाव लाना होगा.

वहीं, राज्य के सभी प्रमुख फल और सब्जियों के थोक बाजार सड़क के किनारे सुबह 5 बजे से 10 बजे तक बिना किसी बुनियादी सुविधा के काम कर रहे हैं. कारोबारियों में आसपास के गांवों के किसान, साइकिल, रिक्शा, ऑटो-रिक्शा, मोटर बाइक और छोटे पिकअप ट्रक पर आने वाले स्थानीय फल और सब्जी विक्रेताओं सहित थोक खरीददार और विक्रेता शामिल होते हैं. ये बाजार ऐसे व्यक्तियों द्वारा

इसकी प्रमुख बातें निम्नलिखित है.

1. पूरे बिहार में हर 10 किलोमीटर पर किसानों के लिए कृषि मंडी हो जहां उनके आनाज और अन्य कृषि उत्पादों का सरकारी एजेंसियों के द्वारा अधिग्रहण हो. इन सभी मंडियों में कंप्यूटर टेक्नोलॉजी, डिजिटल नाप-तौल, और गोदाम सहित तमाम संसाधन होंगे. जिससे किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले.

2. साथ ही पंचायत स्तरीय लघु कृषि मंडी और खाद्यान्य विपणन और अधिग्रहण केंद्र की स्थापना.

3. सरकारी कृषि मंडियों के संचालन की जिम्मेवारी बाजार समिति की होगी. कृषि मंडी के देखरेख के लिए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, और सचिव का चुनाव किसानों के बीच से ही होगा.

4. पूरे बिहार निजी मंडियों, कृषि हाट और अनाज अधिग्रहण केंद्र के स्थापना हेतु सरकार द्वारा ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन भी दिया जाए, जिससे पूरे प्रदेश में कृषि उत्पादों के लिए उपयुक्त मार्केटिंग का ढांचा विकसित हो.

5. कृषि मंडी में किसानों से अनाज कम से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए और किसानों से अनाज बिक्री के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाए

6. कृषि मंडी, गोदाम, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग यूनिट के स्थापना हेतु सरकार भूमि, भवन, राशि, बिजली, पानी, समेत सभी प्रकार के संशाधन के लिए प्रति वर्ष सरकारी बजट में राशि आवंटित करे.

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