TNP DESK- बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है. राज्य के दो मंत्रियों के अलग-अलग दौरों को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं. एक ओर सिवान में बिहार सरकार के मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता 40 से ज्यादा गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे, तो दूसरी ओर जमुई में प्रभारी मंत्री संजय सिंह ट्रेन से यात्रा कर ईंधन बचाने का संदेश देते नजर आए लेकिन उनकी सरकारी गाड़ी पटना से सड़क मार्ग से जमुई पहुंच गई. दोनों मामलों को लेकर विपक्ष सरकार पर दिखावा राजनीति करने का आरोप लगा रहा है.
दरअसल, सिवान जिले में बिहार सरकार के मंत्री सह प्रभारी मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता सहयोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उनका लंबा काफिला चर्चा का विषय बन गया. बताया गया कि मंत्री करीब 40 गाड़ियों के साथ सिवान पहुंचे. जबकि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल की बचत करने और ईंधन का कम उपयोग करने की अपील की थी. कार्यक्रम के बाद जब पत्रकारों ने मंत्री से इस संबंध में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वह सिर्फ दो गाड़ियों के साथ चल रहे थे. हालांकि मौके पर मौजूद वीडियो और तस्वीरों में लंबा काफिला साफ दिखाई देने के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया.
इधर जमुई में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह पहली बार सहयोग शिविर कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे. स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचाने की अपील का पालन करते हुए वह ट्रेन से जमुई आए हैं. मंत्री ने कहा कि ईंधन संरक्षण जरूरी है और जनप्रतिनिधियों को भी इसका पालन करना चाहिए.
लेकिन कुछ ही देर बाद मामला चर्चा का विषय बन गया, जब यह जानकारी सामने आई कि मंत्री की सरकारी गाड़ी पटना से सड़क मार्ग के जरिए जमुई पहुंची थी. इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि अगर सरकारी वाहन खाली ही पटना से जमुई आया तो ईंधन बचत का दावा कितना सही है.
राजद नेताओं ने दोनों मामलों को लेकर सरकार पर हमला बोला है. जमुई में राजद जिला अध्यक्ष त्रिवेणी यादव ने इसे दिखावा और ढकोसला बताते हुए कहा कि जनता को भ्रमित करने के लिए इस तरह की राजनीति की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ प्रधानमंत्री सादगी और ईंधन बचाने की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ उनके नेता व्यवहार में उसका पालन नहीं कर रहे.
दोनों घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है. लोग इसे राजनीतिक संदेश और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर के रूप में देख रहे हैं.