नालंदा : जिले के रहुई थाना क्षेत्र के जगतनंदनपुर गांव में पुत्र की चाह से जुड़ी एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. ज़हर खाने से महिला और उसकी दो मासूम बेटियों की दर्दनाक मौत हो गई. इस त्रासदी ने न सिर्फ एक परिवार को तबाह कर दिया बल्कि समाज में आज भी मौजूद बेटियों के प्रति भेदभाव की कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है.
पुत्र नहीं होने के कारण ससुराल वाले करते थे प्रताड़ित
उनकी शादी करीब 10 वर्ष पहले जगतनंदनपुर गांव निवासी पिंटू यादव से हुई थी. शादी के बाद कविता ने दो बेटियो गुंजन और सपना को जन्म दिया. मायके पक्ष का आरोप है कि बेटे को जन्म नहीं देने के कारण कविता को ससुराल में लगातार प्रताड़ित किया जाता था. उसके साथ मारपीट की जाती थी और मानसिक रूप से उसे तोड़ा जाता था.
मायके पक्ष वालों ने ससुराल पक्ष पर लगाया आरोप
मायके वालों का कहना है कि यही प्रताड़ना अंततः इस खौफनाक अंजाम तक पहुंची. परिजनों ने आरोप लगाया है कि ससुराल पक्ष ने कविता और उसकी दोनों बेटियों को ज़हर देकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया. घटना की सूचना मिलते ही रहुई थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को बुलाया है ताकि हर पहलू की वैज्ञानिक जांच की जा सके.
पुलिस मामले की सभी एंगल से जांच में जुटी
फिलहाल पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहारशरीफ के मॉडल अस्पताल भेज दिया है. मामले में हत्या का गंभीर आरोप लगाया गया है और पुलिस सभी एंगल से जांच में जुटी हुई है. इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर कब तक बेटियों के जन्म की सजा मां और मासूम बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी.
