जहानाबाद : नगर थाना क्षेत्र में एक निजी अस्पताल बस सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक प्रसूता महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो जाने से परिजनों में आक्रोश फैल गया. मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है.
मरीज को पटना या गया ले जाने की सलाह दी गई
परिजनों के अनुसार महिला पूरी तरह स्वस्थ थी और प्रसव के लिए इलाज कराने आई थी. बताया गया कि पहले महिला को मखदुमपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. परिजनों का आरोप है कि सदर अस्पताल में भर्ती प्रक्रिया में काफी समय लग गया और बाद में अस्पताल कर्मियों द्वारा यह कहा गया कि रात में ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है इसलिए मरीज को पटना या गया ले जाने की सलाह दी गई.
परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों ने जल्द ऑपरेशन कराने की जरूरत बताते हुए निजी क्लीनिक ले जाने की सलाह दी. इसके बाद परिजन महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराए जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. परिजनों का कहना है कि भर्ती के लगभग आधे घंटे तक महिला अपने परिजनों से बातचीत करती रही और उसका अल्ट्रासाउंड भी कराया गया था.
अस्पताल प्रबंधन ने इलाज से संबंधित कागजात अपने पास रख लिया
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इलाज से संबंधित कागजात अपने पास रख लिए और उन्हें उपलब्ध नहीं कराया. साथ ही उन्होंने कहा कि जब उन्होंने डॉक्टरों से मौत के कारण के बारे में पूछताछ की तो अस्पताल प्रशासन ने पहले ही पुलिस को सूचना दे दी. परिजनों का आरोप है कि पुलिस दो लोगों को पूछताछ के लिए थाना ले गई.
अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा
घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा. रिपोर्टर द्वारा अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन अस्पताल में कोई भी जिम्मेदार पदाधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं मिला जिससे अस्पताल पक्ष का आधिकारिक बयान सामने नहीं आ सका है.
परिजनों ने यह भी बताया कि इलाज के नाम पर उनसे करीब 20 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसमें 10 हजार रुपये जमा भी कराए गए थे. घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
फिलहाल मामले को लेकर पुलिस जांच में जुटी हुई है. सिविल सर्जन और प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान आना अभी बाकी है. यह घटना सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं और रेफरल व्यवस्था को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
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