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किसानों के लिए बड़ा तोहफा, बिहार में कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर कोष से बदल रही खेती की तस्वीर

BY -
Varsha Varma CE
Varsha Varma CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 16, 2026, 5:26:16 PM

पटना(PATNA): बिहार में खेती अब सिर्फ पारंपरिक तरीके तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के सहारे एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है. राज्य सरकार और केंद्र की संयुक्त पहल ‘कृषि अवसंरचना कोष (AIF)’ किसानों के लिए बड़े बदलाव का माध्यम बनती जा रही है. इस योजना के जरिए कृषि उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है.

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस योजना की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि यह राज्य के कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन ला रही है. उन्होंने बताया कि 04 नवंबर 2025 तक राज्य में इस योजना के तहत कुल 2045 परियोजनाओं को स्वीकृति दी जा चुकी है, जिनके लिए लगभग 1650.37 करोड़ रुपये का निवेश मंजूर किया गया है.

योजना के अंतर्गत सबसे अधिक जोर भंडारण क्षमता को मजबूत करने पर दिया गया है. अब तक 834 गोदाम परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिससे फसलों के सुरक्षित भंडारण और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. इसके साथ ही कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए 591 परियोजनाएं भी लागू की जा रही हैं.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य में 315 प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए गए हैं. वहीं, छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 196 कस्टम हायरिंग सेंटर भी बनाए गए हैं.

इसके अलावा, इस योजना के दायरे में ई-मार्केटिंग प्लेटफॉर्म, साइलो, पैक-हाउस, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, रिपेनिंग चैंबर्स, जैविक इनपुट उत्पादन इकाइयां और स्मार्ट व प्रिसिजन फार्मिंग जैसी आधुनिक संरचनाएं भी शामिल हैं, जो कृषि क्षेत्र को तकनीक आधारित बना रही हैं.

कृषि मंत्री ने किसानों, युवाओं और उद्यमियों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की. उन्होंने बताया कि योजना के तहत 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी दी जाती है, जो अधिकतम 7 वर्षों तक उपलब्ध है. इसके अलावा, पात्र आवेदक एक से अधिक स्थानों पर अधिकतम 25 परियोजनाएं भी स्थापित कर सकते हैं.

इस योजना में 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर ‘क्रेडिट गारंटी कवरेज’ भी प्रदान किया जाता है, जिससे लाभार्थियों को बिना किसी संपार्श्विक (कोलैटरल) के ऋण सुविधा मिलती है. साथ ही, परियोजना लागत का केवल 10 प्रतिशत अंशदान ही आवेदक को वहन करना होता है, जिससे निवेश करना आसान हो जाता है. योजना का लाभ व्यक्तिगत किसान, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, स्टार्टअप, पैक्स, संयुक्त देयता समूह, मिल मालिक, प्रसंस्करण इकाइयों, व्यापारियों और अन्य कृषि आधारित संस्थाओं तक व्यापक रूप से पहुंचाया जा रहा है.

 

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