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यूसीसी के विरोध में उतरा जनजातीय समाज, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की गुहार

यूसीसी के विरोध में उतरा जनजातीय समाज, राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की गुहार

रांची(RANCHI)- “आदिवासी समाज किसी भी कीमत पर अपनी लोक परंपराओं, लोक प्रथा, रीति रिवाज, संस्कृति और प्रथागत कानूनों के साथ खिलवाड़ की इजाजत नहीं देगा. आश्चर्य है कि एक राष्ट्रपति जो खुद संथाली समुदाय से आती हैं, इस मुद्दे पर चुप हैं, जब यूसीसी के नाम पर हमारे प्रथागत कानूनों को खत्म करने की खतरनाक साजिश रची जा रही है, उनकी चुपी जनजातीय समाज के लिए हैरान करने वाली है.” समान नागरिक संहिता के विरोध में यह आवाज केन्द्रीय सरना समिति के सदस्य कृष्ण कांत टोप्पो का है.

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर केन्द्रीय सरना समिति झारखंड के सभी 24 जिलों में जागरुकता अभियान चलायी जायेगी, साथ ही आदिवासी समुदाय और उससे जुड़े संगठनों की ओर से विधि आयोग को ईमेल भेज कर जनजातीय समाज की भावनाओं से अवगत करवाया जायेगा. विधि आयोग से कस्टमरी लॉ से छेड़ छाड़ की कोशिश से दूर रहने की अपील की जायेगी.

ध्यान रहे कि 2024 लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती नजर आ रही है, समान नागरिक संहिता को वह 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना मास्टर स्ट्रोक मान रही है, लेकिन इस कथित मास्टर स्ट्रोक देश के विभिन्न सामाजिक समूहों की ओर से विरोध शुरु हो चुका है. कई अल्पसंख्यक समुहों के साथ ही जनजातीय समाज भी इसके विरोध में खड़ा होता नजर आ रहा है.

झारखंड में यूसीसी के विरोध में मोर्चा खोलते हुए केन्द्रीय सरना समिति ने कहा है कि समान नागरिक संहिता जनजातीय समाज के प्रथागत कानूनों को कमजोर करने का एक खतरनाक षडंयत्र है और हम इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे. हमारे लिए हमारी प्रथा और पंरपरायें ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.

जनजाति सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने दावा किया है कि “हम न केवल विधि आयोग को ईमेल भेजकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे, बल्कि जमीन पर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे, हमारी रणनीतियां तैयार करने के लिए बैठकों की योजना बनाई जा रही है,' समान नागरिक संहिता संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के प्रावधानों को कमजोर करने की कोशिश है और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.

पांचवी और छठी अनुसूची पर खतरा

उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूची झारखंड सहित आदिवासी बहुल राज्यों में अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित है. छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में आदिवासी क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान हैं. समान नागरिक संहिता पांचवी और छठी अनुसूची को कमजोर करने का सुनियोजित षडयंत्र है.

 

Published at:03 Jul 2023 12:52 PM (IST)
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