☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. Big Stories

सोशल इंजीनियर लालू यादव तो मैकेनिकल इंजीनियर तेजस्वी, Engineers Day पर राजद समर्थकों ने कुछ इस तरह से दी बधाई

सोशल इंजीनियर लालू यादव तो मैकेनिकल इंजीनियर तेजस्वी, Engineers Day पर राजद समर्थकों ने कुछ इस तरह से दी बधाई

TNPDESK-एक तरफ भाजपा सनातन धर्म को बचाने की मुहिम चला रहा है और इस बात का दावा कर रहा है कि राजद और इंडिया एलायंस का पूरा खेल सनातन धर्म को ध्वस्त करने का है. दूसरी तरफ राजद समर्थकों की पूरी कोशिश इस विमर्श को बदल कर दलित-आदिवासी और पिछड़ों के बुनियादी सवाल को राजनीति का केन्द्र बिन्दू बनाने की है. छूआछूत, सामाजिक विभेद और दलित पिछड़ों का सामाजिक राजनीतिक जीवन में हिस्सेदारी के सवाल को राजनीति का विमर्श में स्थापित करने की है.

 

#EngineersDay की बधाई। pic.twitter.com/tmmVopUNOA

— I Support Tejashwi (@TeamTejashwi) September 15, 2023

यही कारण है कि जहां एक तरफ शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर उदयनिधि स्टालिन के द्वारा मचाये गये सियासी-सामाजिक तूफान के बीच भी रामचरित मानस की तुलना पोटेशियम साइनाइड से करने से जरा भी नहीं हिचकते. वहीं Engineers Day पर राजद समर्थक लालू यादव को एक ऐसा सोशल इंजीनियर करार दे रहे हैं, जिसने हिन्दू धर्म की  उंच-नीच वाली सामाजिक संरचना का पार्ट-पुर्जा खोल कर समानता के रिंच से सबको बराबर कर दिया, जबकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग तेजस्वी यादव ने राजनीति की गाड़ी के मोबिल से मंदिर मस्जिद, धर्म-मजहब, दंगा-फसाद का कचरा छान कर रोजगार, स्वास्थ्य सड़क इत्यादि का फिल्टर लगा दिया.

साफ है कि शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर हो या Engineers Day राजद समर्थकों की यह मुहिम कुछ भी अनायास नहीं है. सब कुछ सोची समझी राजनीति का हिस्सा है,  इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि जब शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर मानस की तुलना पोटेशियम साइनाइड से कर रहे होंगे, तो वह इसको लेकर चलाये जाने वाले विरोध और प्रतिकार के संभावित खतरे से अनजान होंगे, एक राजनेता के रुप में उन्हे इसके संभावित खतरे का पूरा ज्ञान होगा, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने यह खतरा उठाना कबूल किया, तो साफ है कि वह उदयनिधि स्टालिन की राह पर चलते हुए उतर भारत की राजनीति में पेरियार रामास्वामी नायकर और सीएन अन्नादुरई के सामाजिक विमर्श को स्थापित करना चाहते हैं और उनकी इस राजनीति में राजद का मौन सहमति है.

क्योंकि जैसे-जैसे सनातन धर्म में शुद्रों और महिलाओं की निम्नतर स्थिति, छुआछूत, जाति विभेद और कथित दोयम दर्जे की जिंदगी का सवाल राजनीति और सामाजिक विमर्श के केन्द्र में स्थापित होगा तो उसके साथ ही दक्षिण भारत की तरह ही उतर भारत की राजनीति में भी बड़ा बदलाव आयेगा. कई स्थापित तथ्य टूटेंगे, कई प्रतिमान ध्वस्त होंगे, और इसके साथ ही मौजूदा राजनीति की धार भी बदल जायेगी.

ध्यान रहे कि उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद अब बिहार के शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर ने रामचरित मानस के खिलाफ एक बार फिर से मोर्चा खोल दिया है. चन्द्रशेखर ने कहा है कि रामचरित मानस में पोटेशियम साइनाइड भरा पड़ा है, और जब तक इसका पोटेशियम साइनाइड खत्म नहीं कर दिया जाता, वह इसके खिलाफ अपना विरोध जारी रखेंगे.

चन्द्रेशखर का सवाल चरित्रहीन ब्राह्मणों की पूजा और पढ़े लिखे चरित्रवान पिछड़ों की उपेक्षा क्यों

बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चन्द्रशेखर ने रामचरित मानस के सुंदर कांड के एक दोहे का जिक्र करते हुए पूछा कि हमारी जीभ काटने की कीमत 10 करोड़ तय की गयी है, लेकिन सवाल है कि मेरी गर्दन की कीमत क्या होगी? भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को इसका जवाब देना चाहिए कि मानस में पिछड़ों-दलितों के प्रति इतनी नफरत क्यों भरी पड़ी है? क्या भाजपा दलित-पिछड़ों के खिलाफ उस नफरत के साथ खड़ी है? क्या हम शुद्र है, क्या हम शुद्रों को संपत्ति रखने का अधिकार नहीं है. पूजहि विप्र सकल गुण हीना, शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा का अभिप्राय क्या है? क्या हमारी जीभ काटने से इसका समाधान हो जायेगा? आज नहीं तो कल हमें इन प्रश्नों से टकराना ही होगा, आखिर वेद पढ़ लिख कर भी शुद्र पूजा के योग्य क्यों नहीं है? और गुण हीन,  चरित्रहीन ब्राह्मणों की पूजा क्यों होगी?

पूर्वज चिम्पैंजी तो जातियों का आविष्कार किसने किया

ध्यान रहे कि चन्द्रशेखर के लिए यह पहला मौका नहीं है, इसके पहले भी वह रामचरित मानस को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं, और मानस को दलित पिछड़ों के खिलाफ एक षडयंत्र बताते रहे हैं. चन्द्रशेखर ने पूछा है कि जब विज्ञान कहता है कि हमारे सबके पूर्वज चिम्पैंजी थें, तब यह जातियां कहां से आयी. किस सामाजिक वर्ग की हिफाजत के लिए जातियों का आविष्कार किया गया.

दक्षिण की तरह उतर में भी सामाजिक विमर्श के मुद्दे बदलने की कोशिश

साफ है कि एक तरफ भाजपा सनातन का सवाल खड़ा कर अपने कोर वोटरों को लामबंद करने में लगी हुई है तो उसकी काट में दलित-पिछड़ों की किलेबंदी भी तेज होती नजर आ रही है. साथ ही इसका स्वरुप भी अब राष्ट्रीय होता जा रहा है, क्या दक्षिण क्या उतर सब जगह अब इसकी गुंज सुनाई पड़ने लगी है. इस परिस्थिति में यह देखना दिलचस्प होगा कि 2024 के लोकसभा चुनाव आते आते यह राजनीति कौन सा मोड़ लेती है. लेकिन इतना साफ है कि रामासामी पेरियार, सीएन अन्नादुरई का सामाजिक संघर्ष उतर भारत की राजनीति में भी अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है और यही कारण है कि दलित पिछड़ों की ओर से सामाजिक विमर्श के मुद्दे को  बदलने की गंभीर कोशिश की जा रही है.

Published at:15 Sep 2023 06:46 PM (IST)
Tags:Social engineer Lalu Yadavmechanical engineer TejashwiRJD supporters congratulated in this way on Engineers Day.Engineers Day congratulation in biharRjdlalu yadavPatnasupporter of rjdedcation minister of biharchandrashedkhaEducation Minister Chandrashekharcomparing Manas with Potassium Cyanideउदयनिधि स्टालिन
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.