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क्या पॉवर ब्रोकर और सिंडिकेटरो की भेंट चढ़ गई हेमंत सरकार ! ईडी की कार्रवाई से सच आया सामने, पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट

BY -
Sanjeev Thakur CW
Sanjeev Thakur CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 9:23:11 PM

Ranchi (TNP Desk) : झारखंड जिसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य कहा जाता है. प्रकृति ने भी इस राज्य को बहुत ही सलीके से बनाया है. पहले बिहार का ही हिस्सा था, लेकिन जब से ये राज्य अलग हुआ तब से ना जानें किसकी नजर लग गई. झारखंड को अलग हुए 24 साल हो गए, लेकिन दो दशक से ज्यादा वक्त गुजर जाने के दरम्यान कितनी सरकार बनी और कितनी चली गई. लेकिन, इस दौरान सत्ता के दलालों का रसुख भी कायम रहा , जिसने सियासत के साथ-साथ उसा शासन को भी दीमक की तरह चाट लिया. चाहे सरकार किसी की भी हो इन पावर ब्रोकर्स ने सत्ता को नोचा भी और खूब बदनाम किया. झारखंड में शिबू सोरेन, मधु कोड़ा से लेकर हेमंत सरकार तक दलालों ने घेरा रखा और राज्य को खूब लूटा , जिसके चलते इनके शासन में बदनामी की कालिख लगी . अभी ताजा मामला को ही देख लीजिए. इन दलालों के कारण ही हेमंत सोरेन की कुर्सी चली गई. इसी के वजह से हेमंत ईडी की गिरफ्त में है, जहां अभी पूछताछ चल रही है. और वे अपनी बेगुनाही के लिए रोज इम्तहान दे रहें हैं.  

फिलहाल जानिए इन मशहूर तीन दलालों को !

हम आपको बताने जा रहे हैं उन तीन दलाल के बारे में जिसके बारे में आपने खूब पढ़ा और सुना भी होगा. लेकिन ये नहीं जानते होंगे सत्ता के गलियारों में उनकी ताकत कितनी है. चलिए अब हम आपको बता रहे हैं वो तीन नाम. पहला प्रेम प्रकाश, दूसरा विशाल चौधरी और तीसरा अभी हाल में उसका नाम सामने आया है वो है विनोद सिंह. विनोद को इससे पहले आप नहीं जानते होंगे. लेकिन जब से इसका नाम सामने आया है तब से वो भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है.

झारखंड के सबसे बड़े पावर ब्रोकर

झारखंड के चर्चित व्यवसायी और कई राजनेताओं के करीबी प्रेम प्रकाश अभी मनी लॉड्रिंग मामले में जेल में बंद है. ईडी ने अवैध खनन को लेकर इसके कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. रेड के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद हुए थे. पूछताछ के दरम्यान उसने कई खुलासे किए, जिसे सुन ईडी के अधिकारी भी दंग हो गए थे. प्रेम प्रकाश को हेमंत सोरेन का करीबी माना जाता है. प्रेम को झारखंड के सबसे बड़े पावर ब्रोकर के तौर पर जाना जाता है. आईएएस आईपीएस अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग से लेकर कई ठेकों को मैनेज करने में प्रेम प्रकाश को बड़ा खिलाड़ी कहा जाता है.

सत्ता चाहे किसी की भी हो पहुंच ऊपर तक

सत्ता के गलियारे में प्रेम प्रकाश का जाना-माना नाम है. चाहे बीजेपी की सरकार ही हो या झारखंड मुक्ति मोर्चा की सब में प्रेम की पैठ रही है. एक साधारण बैंक कर्मचारी से लेकर सत्ता के गलियारे तक पहुंचे प्रेम प्रकाश से जुड़ी कहानी भी काफी दिलचस्प है. वो मूलरूप से बिहार के सासाराम के फजलगंज का रहने वाला है. पिता के निधन के बाद प्रेम को अनुकंपा पर बैंक में नौकरी मिली. प्रेम की पोस्टिंग एसबीआई राजभवन ब्रांच पटना में हुई. बैंक में नौकरी करते हुए उसका नेताओं, अफसरों और कारोबारियों से संपर्क बना और वो ब्लैक मनी को व्हाइट करने लगा. इसी दौरान बिहार के एक कद्दावर नेता का पैसा डूबने के बाद वो भागकर झारखंड आ गया. प्रेम प्रकाश ने झारखंड में मिड-डे मील के तहत अंडा आपूर्ति का काम लिया था. रांची की अशोक नगर के रोड नंबर 5 के सामने एक अपार्टमेंट में उनका साम्राज्य चलता था. वहीं, बरियातू थाने के पीछे एक अपार्टमेंट के पेंट हाउस में आयोजित उनकी पार्टी में सत्ता के तमाम बड़े लोग जाते थे. कहा जाता है कि पिछले 7 से 8 साल में प्रेम प्रकाश की संपत्ति करोड़ों की हो गई है.

विशाल चौधरी ने बनायी करोड़ों की संपत्ति

राज्य में ईडी की कार्रवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई वैसे-वैसे एक-एक कड़ी जुड़ता चला गया. इसी बीच ईडी को पता चला कि राज्य में एक और पावर ब्रोकर है. जिसका नाम विशाल चौधरी है. उसका सिक्का झारखंड पुलिस हॉउसिंग कारपोरेशन में चलता है और सरकार का काफी करीबी है. ईडी ने जब जांच को आगे बढ़ाया तो झारखंड में सत्ता के गलियारे में सक्रिय रहे पावर ब्रोकर विशाल चौधरी और सीनियर आईएएस राजीव अरुण एक्का की सांठगांठ से करीब 200 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के सबूत जुटा लिए. एजेंसी ने जुटाए गए सबूतों और ब्योरों पर एक रिपोर्ट राज्य सरकार और एंटी करप्शन ब्यूरो के साथ साझा की है. ईडी ने राज्य सरकार से इन सबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने को कहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इन्होंने राज्य में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, टेंडर, सरकारी संस्थाओं के लिए खरीदारी में कमीशनखोरी के जरिए अवैध कमाई की. बताया गया है कि आईएएस राजीव अरुण एक्का ने अपने बहनोई निशिथ केसरी, अपनी पत्नी और बेटी को भ्रष्टाचार के जरिए की गई अवैध कमाई में साझीदार बनाया. ईडी ने इनके आयकर रिटर्न में भी गड़बड़ियां पकड़ी हैं. फिलहाल ये भी होटवार जेल में बंद है.

हेमंत सोरेन के करीबी हैं विनोद सिंह

विनोद सिंह का नाम हाल ही में लोगों ने जाना, इससे पहले इसका नाम सिर्फ राजनेता और अधिकारी तक ही सीमित था. इसका नाम जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक के बाद आया है, जब ईडी ने पेपर लीक का जांच शुरू किया. कहा ये भी जाता है कि विनोद सिंह पूर्व सीएम हेमंत सोरेन के करीबी हैं. पेशे से आर्किटेक्ट विनोद सिंह का रांची के मेन रोड रोस्पा टावर में ग्रिड कंसलटेंसी नाम से फर्म है. रांची के पिस्कामोड़ शिव मंदिर परिसर के ठीक सामने वाली गली में विनोद सिंह का आवास है. विनोद सिंह के पिता राज्य प्रशासनिक सेवा के रिटायर अधिकारी हैं. उनका नाम जेएन सिंह है. वे रांची में सदर अनुमंडल पदाधिकारी रह चुके हैं. बाद में बिजली बोर्ड में भी सचिव के पद रहे हैं. सूत्रों की माने तो सरकार और सत्ता से जुड़े कई कामों में विनोद सिंह के नाम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आते रहे हैं. बताया जाता है कि वह बीआईटी मेसरा में सीएम हेमंत सोरेन के साथ पढ़ते थे.

हेमंत सोरेन और आर्किटेक्ट विनोद सिंह के बीच हुआ चैट

कथित जमीन घोटाले में गिरफ्तार हेमंत सोरेन और आर्किटेक्ट विनोद सिंह के बीच चैट होने का ईडी ने दावा किया. जांच एजेंसी ने कोर्ट में हेमंत सोरेन और आर्किटेक्ट विनोद सिंह के बीच 539 पेज के वॉट्सएप चैट होने की बात कही. इसके कुछ पेज कोर्ट में भी पेश किए. यह चैट ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर लेन-देन से संबंधित है. इनमें कई गोपनीय सूचनाएं भी हैं. यही नहीं, इसमें झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड भी शेयर किए गए हैं.

रवि केजरीवाल के सहारे अमित अग्रवाल ने सरकार बनाई अपनी पैठ

कोलकाता व्यवसायी अमित अग्रवाल वो नाम है जिसकी पहुंच झारखंड के सीएमओ तक थी. इसकी पहुंच यहां तक ऐसे ही नहीं हुई उसने रवि केजरीवाल के जरिए तत्कालीन हेमंत सरकार में घुसपैठ बनाई. रवि झारखंड मुक्ति मोर्चा में कोषाध्यक्ष पद पर थे. जब ईडी की कार्रवाई शुरू हुई तो जांच के दायरे में रवि केजरीवाल और अमित अग्रवाल आये. कथित जमीन घोटाले मामले में हेमंत सोरेन से पहले अमित का नाम आया था. जब ईडी ने उससे पूछताछ करनी शुरू की तो कई राज उसने उगल दिये. उसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल ये भी जेल में बंद है. कहा तो ये भी जाता है कि हेमंत की कुर्सी जाने में इसका बड़ा रोल रहा है. दरअसल सेना से जुड़ी करोड़ों की जमीन को औने-पौने दाम में बेच दिया गया. जब इसका खुलासा हुआ तो सभी दंग रह गए. बता दें कि हेमंत सोरेन एक पढ़े-लिखे सीधे-साधे राजनेता हैं. उन्होंने जनकल्याण के लिए कई योजनाएं लाए, जिससे लोग लाभान्वित हुए. लेकिन इन पावर ब्रोकर की रसूख सत्ता के गलियारों में इतनी थी कि हेमंत की इनके सामने एक नहीं चली.

हेमंत की कुर्सी गिराने में योगेंद्र तिवारी का भी रहा बड़ा हाथ

शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी की भी सरकर में रसूख कम नहीं थी. इसके पास इतना पावर था कि शराब का ठेका लेने के लिए अपने मुताबिक नीति ही बदल दी और हेमंत सोरेन को पता हीं नहीं चला. क्योंकि वे लोगों के हित में काम कर रहे थे. ईडी की जांच जब शुरू हुआ तब खुलासा हुआ कि योगेंद्र तिवारी बालू व शराब के अवैध धंधे में खुद व अपने नजदीकी करीबियों के माध्यम से आपराधिक कृत्य में लिप्त था. सभी करीबियों पर योगेंद्र तिवारी का नियंत्रण था. योगेंद्र ने बालू व शराब के अवैध कारोबार से 14.79 करोड़ कमाया. वित्तीय वर्ष 2021-22 में पूरे झारखंड में शराब के धंधे पर पूरा नियंत्रण था. ईडी ने झारखंड, बिहार व बंगाल में उससे जुड़े 32 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी. उसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल योगेंद्र तिवारी जेल में बंद हैं.

लिस्टों की है लंबी फेहरिस्त

अभी तो हमने सिर्फ तीन पावर ब्रोकर की जानकारी दी है. लेकिन इस लिस्टों की लंबी फेहरिस्त है. इस लिस्ट में आईएएस आईपीएस, नेता, अधिकारियों के नाम शामिल है. जिन्होंने न सिर्फ झारखंड को लूटा है बल्कि सत्ता में बैठे नेताओं के साथ मिलकर मनचाहा काम भी करवाया है. इन्हीं दलालों के कारण राजनेताओं की कुर्सी हिचकोले खाने लगती है. बाद में कुर्सी भी छोड़ना पड़ता है. बता दें कि राज्य में जब से केंद्रीय एजेंसी ने कार्रवाई शुरू की है तब से एक के बाद एक नामों के खुलासे हो रहे हैं. इनमें कई पावर फुल व्यक्ति जेल की हवा खा रहे हैं. अब देखना होगा कि इस लिस्ट में और किस-किस का नाम जुड़ने वाला है.  



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