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I am SORRY! आत्मसम्मान से समझौता नहीं और भरी अदालत में न्यायमूर्ति रोहित देव ने कर दी अपने इस्तीफे की घोषणा

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 4:02:34 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK)- देश में पहले भी कई न्यायाधीशों के द्वारा इस्तीफे की घोषणा की गयी है. लेकिन न्यायमूर्ति रोहित देव ने भरी अदालत मे अपने इस्तीफे की घोषणा कर सनसनी फैला दी है. उनके इस्तीफे के बाद कयासों का बाजार गर्म है. तरह तरह के आकलन किये जा रहे हैं, हालांकि न्यायमूर्ति रोहित देव ने अपने इस्तीफे  की वजह बेहद निजी कारण बताया है, लेकिन जिस तरह उनके द्वारा भरी अदालत में ‘आई एम सॉरी, आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकता’ के बाद इस्तीफा सौंपा गया, वह बेहद विस्मयकारी है और निजी परेशानियों का तर्क कोर्ट रुम में मौजूद अधिवक्ताओं के साथ ही पूरे देश को हजम नहीं हो रहा है.

बॉम्बे हाई कोर्ट में उच्च न्यायालय की पीठ का मामला

दरअसल यह पूरा मामला बॉम्बे हाई कोर्ट का है, जहां उच्च न्यायालय की पीठ भी है. इसी पीठ में शुक्रवार को अदालत सजी हुई थी, अधिवक्ता अपने मुवक्किलों के साथ अपने-अपने मुकदमें की पैरवी का इंतजार कर रहे थें, इस बीच उन्हें न्यायमूर्ति रोहित देव की एक लाईन सुनाई दी, आई एम सॉरी, आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकता. आगे उन्होंने कहा कि मैं इस अदालत में उपस्थित सभी लोगों से माफी मांगता हूं, कई बार हमने आप सबों को डांटा भी है, इसका मकसद मात्र आपमें सुधार लाने का था, आप सभी मेरे परिवार के अंग है, लेकिन आज यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि हमने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया है. हम अपने स्वाभिमान के विरुद्ध कोई काम नहीं कर सकतें. आशा है कि आप सभी अपनी कड़ी मेहनत से इस पेशे की पवित्रता को बचाये रखेंगे.

महाराष्ट्र सरकार के संकल्प पर लगाया था रोक

ध्यान रहे कि अभी हाल ही में न्यायमूर्ति रोहित देव ने महाराष्ट्र सरकार का एक संकल्प के संचालन पर रोक लगाने का आदेश दिया था, जिसमें सरकार को अवैध खनन के आरोपियों के विरुद्ध राजस्व विभाग के द्वारा शुरु की गई दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने का अधिकार दिया गया था.

प्रोफेसर जीएन साईबाबा को आजीवन कारावास की सजा को रद्द

इसके पहले  वर्ष 2022 में न्यायमूर्ति देव ने कथित तौर पर माओवादियों से संपर्क रखने के आरोपी पूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर उन्हे बरी कर दिया था. अपने फैसले में न्यायमूर्ति देव ने लिखा था कि गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) के तहत वैध मंजूरी के अभाव में मुकदमे की कार्यवाही शून्य थी. लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी थी और मामले को नये सिरे सुनने का आदेश दिया था.   

Tags:Justice Rohit Dev announced his resignation in a packed courtJustice Rohit DevMaharashtra government's operation of a resolutionpunitive action initiated by the revenue departmentormer professor GN Saibaba

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