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विरोधी दलों को तोड़ती रही भाजपा पर अब काउंटर अटैक! बेंगलुरु बैठक के बाद बिहार-झारखंड में होगा पहला ऑपरेशन

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:03:11 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK) अब तक विरोधी दलों को तोड़ने में सिद्धहस्त मानी जाती रही भाजपा को अब काउंटर अटैक का सामना करना पड़ सकता है. खबर है कि बेंगलुरु की बैठक में इस काउंटर प्लान पर सभी दलों की सहमति के बाद आगे की रणनीति तैयार की जा सकती है. ताकी इस परसेप्शन को तोड़ा जा सके कि सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही अपने विरोधियों को तोड़ सकती है, माना जाता है कि यदि यह प्लान सफल रहा है तो भाजपा का ताकतवर होने का जो भ्रम मीडिया में फैलाया जाता रहा है, वह एकबारगी ध्वस्त हो जायेगा, और भाजपा की छवि एक कमजोर दल के रुप में होने लगेगी, दावा इस बात का भी किया जा रहा है कि इस काउंटर प्लान के बाद भाजपा आक्रमण के बजाय बचाव की मुद्रा में खड़ी हो जायेगी. और उसके बाद उसके अन्दर से टूट का लम्बा सिलसिला शुरु हो जायेगा.  

सार्वजनिक रुप से प्लान पर चर्चा से परहेज, लेकिन अन्दरखाने चर्चा तेज

हालांकि अभी तक सार्वजनिक रुप से इस प्लान की चर्चा नहीं की जा रही है, इसके विपरीत दावा इस बात किया जा रहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी मंच का नामांकरण, भाजपा के मुकाबले हर सीट पर विपक्ष का एक उम्मीदवार खड़ा करना और मंच के संयोजक का चयन करना है. लेकिन दावा इस बात का है कि इन मुद्दों के साथ ही  पार्टी तोड़ने की साजिशों का काउंटर प्लान भी एक बड़ा मुद्दा है, जिस  पर अन्दर खाने चर्चा तेज है.

कौन है इस प्लान का सूत्रधार

दावा किया जा रहा है कि इस प्लान के सूत्रधार सीएम नीतीश और शरद पवार हैं, और इसका पहला सफल प्रयोग झारखंड बिहार में किया जाना है. ध्यान रहे कि काफी अर्से से भाजपा झारखंड में झामुमो और बिहार मे जदयू को तोड़ने की प्लान बनाती रही है. लेकिन दोनों ही जगहों पर उसे सफलता नहीं मिली, हालांकि वह महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी को तोड़ने में सफल रही.

राजनीति के जादूगर माने जाते हैं सीएम नीतीश और शरद पवार

ध्यान रहे कि सीएम नीतीश के बारे में आम धारणा यह है कि उनके भविष्य के प्लान की जानकारी उनके बेहद करीबियों को भी नहीं होती, जब वह किसी प्लान पर काम करते हैं, तो उसके एक-एक बारीकियों पर अपनी नजर रखते हैं, इसकी एक बानगी तब मिली थी, जब राजद के साथ हाथ मिलाने की खबरों के बीच उन्होंने एआईएमआईएम के पांच विधायकों को तोड़कर राजद में शामिल करवा दिया था, ताकी वह बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बना जाय. दरअसल इसके पीछे वजह यह थी कि दलबदल की कोशिश के बीच भाजपा भी सरकार बनाने का अपना दावा ठोंक सकती थी, लेकिन राजद का सबसे बड़ी बनते ही उसका यह दावा हाथ से निकल गया और राज्यपाल सदन में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए मजबूर हो गयें. हालांकि यह नौबत नहीं आयी और राज्यपाल ने उन्हे एक बार फिर से शपथ ग्रहण के लिए बुला लिया. क्योंकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी से दूसरी पार्टी बन चुकी थी.

यही कारण है कि भाजपा के खिलाफ काउंटर अटैक करने की जिम्मेवारी सीएम नीतीश के कंधों पर ही सौंपे जाने की तैयारी है, इसके बाद बिहार और झारखंड भाजपा पर टूट के संकट मंडराने लगे हैं. हालांकि इस एंटी भाजपा ऑपरेशन की शुरुआत झारखंड से होगी या बिहार से या और किसी राज्य से अभी इस पर सस्पेंस कायम है.

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