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भाजपा का जन्म ही पिछड़ा विरोध में हुआ, जातीय जनगणना का समर्थक कैसे कर सकती है?  लालू के निशाने पर केन्द्र सरकार

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 9:32:32 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK)-जातीय जनगणना के मुददे पर भाजपा को निशाने पर लेते हुए लालू यादव ने अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है, राजद सुप्रीमो ने इस बात का दावा किया है कि भाजपा का जन्म ही पिछड़ा विरोध में हुआ, वह पार्टी जिसका जन्म ही पिछड़ों का अधिकार को कुचलने के लिए किया गया हो, वह जातीय जनगणना का समर्थन कैसे कर सकती है, वे लोग जो भाजपा से जातीय जनगणना के समर्थन की उम्मीद पाले हैं, उन्हे भाजपा के अतीत को समझने की कोशिश करनी चाहिए.

एक ही दिन में दाखिल किया गया अलग अलग हलफनामा

यहां बता दें कि जातीय जनगणना के मामले यह सवाल केन्द्र सरकार के परस्पर विरोधी हलफनामे के कारण खड़ा हुआ है. 28 अगस्त को इस मामले में केन्द्र सरकार का रुख को स्पष्ट करते हुए का सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से एक हलफनामा पेश किया गया, जिसके पारा संख्या पांच में यह दावा किया गया कि सेंसस एक्ट 1948 के तहत केन्द्र को छोड़कर किसी राज्य को जातीय जनगणना या इससे मिलते-जुलते सर्वेक्षण करवाने का अधिकार नहीं है. लेकिन कुछ ही घंटों के बाद यह हलफनामा वापस ले लिया जाता है और एक नया हलफनामा पेश किया गया. जिसमें यह कहा गया कि राज्य सरकार जातीय जनगणना तो नहीं करवा सकती, लेकिन वह इससे मिलता जुलता सर्वेक्षण करवाने को स्वतंत्र है. दावा किया गया कि पहले हलफनामें के पारा संख्या पांच में ‘मिलते-जुलते सर्वेक्षण करवाने का अधिकार नहीं’ भूलवश अंकित हो गया था. अब इसी पर विवाद हो गया है. दावा किया जा रहा है कि इस हलफनामें से भाजपा की वास्तविक मंशा सामने आ गयी.

जिसके बाद भाजपा पर हमले तेज हो गयें और यह दावा किया जाने लगा कि दरअसल भाजपा जातीय जनगणना को किसी भी कीमत पर रोकना चाहती है, लेकिन पिछड़ों की सक्रियता के कारण उसके लिए सार्वजनिक रुप से इसका विरोध करना मुश्किल है, इसलिए वह वह कभी इसके समर्थन में हलफनामा पेश करती है तो कभी विरोध में, वह एक तरह अपना आधार मतदाता समूह सवर्णों को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती, वहीं इसका विरोध कर  पिछड़ों की नाराजगी मोल लेने की हिम्मत भी नहीं जुटा रही है, यही उसकी दुविधा का कारण है, और उसकी यही दुविधा उसके अलग-अलग हलफनामें में सामने आ रही है.

बिहार सरकार पहले ही कह चुकी है कि यह जाति आधारित सर्वेक्षण है ना कि जातीय जनगणना

यहां ध्यान रहे कि बिहार सरकार पहले यह कह चुकी है कि यह जातीय जनगणना नहीं बल्कि एक सर्वे हैं. इस प्रकार केन्द्र के इस स्टैंड से बिहार सरकार के जातिगत सर्वेक्षण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. बिहार सरकार के दावे के अनुसार जाति आधारित जनगणना का पूरा काम सम्पन्न हो चुका है. साथ ही इसका डाटा भी अपलोड कर दिया है.

 

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