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डुमरी की हार के बाद सदमे में बाबूलाल, जीत को बताया तुष्टीकरण की राजनीति और प्रशासनिक लूट का नतीजा

डुमरी की हार के बाद सदमे में बाबूलाल, जीत को बताया तुष्टीकरण की राजनीति और प्रशासनिक लूट का नतीजा

रांची(RANCHI)-डुमरी फतह के साथ ही राज्य की हेमंत सरकार ने अब तक की छह विधान सभा उपचुनावों में से पांच पर जीत हासिल कर चुनाव दर चुनाव विजय पताका फहराने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इस जीत के साथ ही यह भी साफ हो गया कि भाजपा आजसू के तमाम दावे के बावजूद हेमंत सरकार की लोकप्रियता राज्य में बरकरार है, हेमंत सरकार ने जिस तेजी से आदिवासी मूलवासी मुद्दों पर नीतिगत निर्णय लिया है, ओबीसी आरक्षण का विस्तार हो या फिर खतियान आधारित नियोजन नीति और स्थानीय नीति के लिए  विधान सभा से विधेयकों का निर्माण, या फिर सरना धर्म कोड पर नीतिगत निर्णय लेते हुए इसे विधान सभा से पारित कर केन्द्र को भेजने की कार्रवाई आदिवासी मूलवासी समूहों को उसका सकारात्मक संदेश गया है. इसके साथ ही वह इस बात को प्रचारित प्रसारित करने में भी सफल रही है कि वह तो आदिवासी मूलवासियों के तमाम मुद्दों के साथ खड़ी है, लेकिन यह तो भाजपा है जो राजभवन के साथ मिलकर इन तमाम विधेयकों पर कुंडली मार कर बैठी है.

भाजपा को जनता के विवेक पर विश्वास नहीं

लेकिन जीत दर जीत हेमंत सरकार का यह बढ़ता काफिला बाबूलाल और भाजपा को गले से नीचे उतर नहीं रहा, जिस प्रकार से डुमरी की जीत को अल्पसंख्यकों का तुष्टीकरण और प्रशासनिक लूट का नतीजा बताया गया, उससे साफ है कि बाबूलाल और भाजपा को जनता के विवेक पर विश्वास नहीं है, वह इन मुददों को उठाकर सीधे सीधी जनता के विवेक पर सवाल उठा रही है. सवाल पूछा जा सकता है कि यदि हेमंत सोरेन की सरकार इतनी ही भ्रष्ट है तो चुनाव दर चुनाव उसे सफलता क्यों मिल रही है.

प्रदेश अध्यक्ष के रुप में पहली ही अग्नि परीक्षा में बाबूलाल को करारी शिकस्त 

भाजपा और बाबूलाल जिस भ्रष्टचार से मुक्ति का दावा कर रहे हैं, वह जनता उनके साथ खड़ा क्यों नहीं हो रही, आज का बड़ा सवाल है, सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष के रुप में पहली ही अग्नि परीक्षा में बाबूलाल जो करारी शिकस्त मिली है, क्या यह उसी का नतीजा है, वह जनता के फैसले को विनम्र भाव से स्वीकार करने के बजाय उस पर सवाल खड़े क्यों कर रहे हैं, जिस प्रकार उनके द्वारा चुनाव के दौरान अपने कार्यकर्ताओं का अपहरण के दावे किये जा रहे हैं, बावजूद इसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं करवायी जा रही है, उससे भी उनके दावे का खोखलापना सामने आता है. यहां बता दें कि जब किसी राज्य या  विधान सभा में चुनाव की घोषणा होती है, तब वहां का सत्ता सीधे सीधे चुनाव आयोग के पास चला जाता है, अधिकारियों पर चुनाव आयोग की नजर रहती है, बावजूद इसके यदि बाबूलाल यह दावा कर रहे हैं कि चुनाव में धांधली हुई तो वह चुनाव आयोग की  विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, और हर कोई जानता है कि चुनाव आयोग भारत सरकार की संस्था है, तब क्या यह माना जाय की हेमंत सोरेन की सरकार के साथ केन्द्र की सरकार खड़ी है, इन सवालों का कोई जवाब बाबूलाल के पास आज के दिन नहीं है,    

Published at:09 Sep 2023 02:16 PM (IST)
Tags:dumari by electionbabulal marandidumari defeatbebi deviJmmbjpJhakrhand
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