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भाई वीरेन्द्र और सुनील सिंह के बाद अब सुधाकर सिंह ने के.के पाठक के विरुद्ध खोला मोर्चा, बर्खास्तगी की उठायी मांग

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:50:41 PM

पटना(PATNA)-शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखर और के.के पाठक के बीच जारी विवाद में राजद नेता भाई वीरेन्द्र और एमएलसी सुनील सिंह के बाद अब पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह की भी इंट्री हो चुकी है. के.के पाठक को निहायत निकम्मा अधिकारी बताते हुए सुधाकर सिंह ने कहा है कि के. के पाठक जिस विभाग में भी जाते हैं, उस विभाग का बंटाधार कर देते हैं, इन्ही के रहते हुए पूरे बिहार में जहरीली शराब से लोगों की मौत हो रही थी और जहरीली शराब की बिहार में इंट्री को रोकने में ये पूरी तरह से नाकामयाब रहे थें.

शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखऱ की प्रशंसा में तारीफों के पुल

शिक्षा मंत्री चन्द्रशेखऱ की प्रशंसा करते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि वह काफी उत्कृष्ट विद्वान है. यह कैसा लोकतंत्र है, जहां अपनी बात को रखने की भी स्वतंत्रता नहीं है. हालांकि के. के पाठक विवाद में लालू यादव के बयानों पर सुधाकर सिंह किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया, उन्होंने कहा कि वह पार्टी के अदना सा सिपाही हैं, लालू यादव के किसी वक्तव्य पर टिप्पणी करने उनकी हैसियत नहीं है. लेकिन इतना साफ है कि के. के पाठक की विदाई कर सरकार को साफ संकेत देना चाहिए कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला उसके निर्वाचित प्रतिनिधियों के हाथ में होगा, किसी भी रुप में सत्ता की बागडोर अधिकारियों के हाथ में सौंपी नहीं जा सकती.

ध्यान रहे कि इस मामले में सीएम नीतीश के हस्तक्षेप के बाद प्रोफेसर चन्द्रशेखर मीडिया के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन पिछले दो दिनों से कार्यालय नहीं आने से राजनीतिक अटकलों का दौर अभी भी जारी है. हालांकि पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने दावा किया है कि इस मामले का कोई असर गठबंधन पर पड़ने वाला नहीं है, महागठबंधन पूरी शक्ति के साथ पीएम मोदी को उखाड़ फेंकने की रणनीति पर काम करता रहेगा. लेकिन बावजूद इसके राजद विधायक भाई वीरेन्द्र ने के. के पाठक को कान पकड़ कर बाहर निकलाने का बयान देकर राजद खेमे की भावनाओं को जग जाहिर कर दिया था, भाई वीरेन्द्र को जदयू कोटे से मंत्री रत्नेश सदा का भी साथ मिला था, रत्नेश सदा ने के. के. पाठक को सांमती मिजाज का व्यक्ति बताते हुए कहा था कि वह अनावश्यक रुप से महादलितों को निशाने पर ले रहे हैं, जबकि राजद कोटे से एमएलसी रहे सुनील सिंह ने यह दावा कर सनसनी फैला दी थी कि सीएम नीतीश अपने मंत्रियों पर निगरानी रखने के लिए इस प्रकार के अधिकारियों का इस्तेमाल एक औजार के रुप में करते रहे हैं. यह उनकी पुरानी अदा है. अब उसी कड़ी में पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह ने भी मोर्चा खोल दिया है.

सीएम नीतीश को के. के पाठक की बलि चढ़ानी ही होगी.  

राजद खेमे से परस्पर विरोधी बयानों से इस बात को बल मिल रहा है कि वहां सब कुछ ऑल इज वेल नहीं है, राजद कार्यकर्ताओं में के. के पाठक के लेकर गहरी नाराजगी है. हालांकि राजद नेतृत्व इस भावनाओं को कम करने की कोशिश करता दिख रहा है, क्योंकि अभी उसके निशाने पर पीएम मोदी है, और वह इस लड़ाई को कमजोर नहीं करना चाहता, ठीक यही स्थिति जदयू खेमे की भी है, वह भी किसी भी हालत में सीएम नीतीश के विपक्षी दलों की एकजुटता की मुहिम को कमजोर नहीं करना चाहता, लेकिन साफ है कि आग लगी हुई है. और यदि इस मामले का स्थायी समाधान करना है, तो सीएम नीतीश को के. के पाठक की बलि चढ़ानी ही होगी

Tags:Bhai VirendraSudhakar SinghSunil SinghKK Pathakशिक्षा मंत्री चन्द्रशेखऱ

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