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ईडी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सीएम हेमंत! दफ्तर पहुंचा बंद लिफाफा

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 1:28:12 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आखिरकार सीएम हेमंत ईडी दफ्तर नहीं पहुंचे, सीएम हेमंत के बदले में सीएम हेमंत का बंद लिफाफा ईडी दफ्तर पहुंचा. हालांकि उस बंद लिफाफे में क्या है, इसकी खबर सामने नहीं आयी है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बंद लिफाफे में इस बात की जानाकारी दी गयी कि एसएलपी दायर कर दी गयी है. अब ईडी के सारे सवालों का जवाब सुप्रीम कोर्ट में दिया जायेगा.

सूत्रों का दावा है कि सीएम हेमंत ने इस मामले में ईडी को सुप्रीम कोर्ट घसीटने का निर्णय लिया है. इसके लिए एसएलपी दायर करने की प्रक्रिया शुरु हो चुकी है. उनके कानून सलाहकार इस मामले में दिल्ली का रुख कर चुके हैं, अगले कुछ घंटों में इसकी पुष्टि की जा सकती है.   

ईडी को समन वापस लेने की बात कह चुके हैं सीएम हेमंत

बता दें कि ईडी ने 14 अगस्त को भी सीएम हेमंत सोरेन को ईडी दफ्तर बुलाया था. लेकिन वे उस दिन उपस्थित नहीं हुए थे. सीएम हेमंत ने कहा था कि ईडी सिर्फ अपने पॉलिटिकल मास्टर को खुश करना चाहती है. उसके पास हमारे खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है. सारी संपत्तियों की पूरी सूची पहले ही आयकर विभाग और ईडी को सौंप दी गयी है. बावजूद इसके अगर ईडी को किसी दूसरे कागजात की जरुरत है तो वह इसकी मांग कर सकती है, लेकिन ईडी का इरादा दोषपूर्ण है. वह जांच नहीं बल्कि एक ऐसे वातावरण का निर्माण चाहती है, ताकि हमारी सामाजिक प्रतिष्ठा को तार-तार किया जा सके.

करीबियों से सहारे सीएम हेमंत तक पहुंचने की कोशिश

सीएम हेमंत की पेशी से ठीक पहले तीस-तीस स्थानों पर एक साथ छापेमारी पर भी अब सवाल उठाये जाने लगे हैं, और इस बात का दावा किया जाने लगा है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई नहीं होकर सीएम हेमंत और झारखंड की सरकार को बदनाम करने की एक सोची समझी रणनीति है, और इसी साजिश के तहत वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के आवास से 30 लाख रुपये की बरामदगी के दावे किये जा रहे हैं,  बरामदगी की खबरों को मीडिया में प्लांट किया जाता है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की जा रही. विरोधियों का दावा है कि इस प्रकार के दावे तो ईडी की हर छापेमारी के बाद किया जाता है, लेकिन बाद में ये सारे हवा-हवाई साबित होते हैं.

छत्तीसगढ़ में खेला जा रहा था यही खेल

उनका दावा है कि छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह के भय का माहौल भी पैदा करने की कोशिश की जा रही थी, बगैर कोई मजबूत साक्ष्य के दो हजार करोड़ के शराब घोटले का दावा किय जा रहा था. लगातार गिरफ्तारियां की जा रही थी. जिसके बाद खुद सीएम बधेल को सामने आना पड़ा और ईडी को कोर्ट में घसीटना पड़ा. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी ईडी को बेवजह भय का माहौल करने से दूर रहने कहा. और गिरफ्तारियों पर रोक लगा दिया.

राजनीतिक रुप से मुकाबले में असक्षम भाजपा खेलती है ईडी का खेल

छत्तीसगढ़ में ईडी की बढ़ती इस दखलअंदाजी पर तंज कसते हुए तब सीएम बघेल ने कहा था कि भाजपा राजनीतिक रुप से हमारा मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है, इसलिए अब मुकाबले के लिए ईडी को भेजा जा रहा है, लेकिन हम ईडी को अब उसी की भाषा में जवाब देंगे और उसके बाद सीएम बघेल ने कानूनी  मोर्चा खोल दिया.  

आदिवासी मूलवासी कार्ड से उजड़ चुकी है भाजपा की जमीन  

विश्लेषकों का दावा है कि झारखंड में भी भाजपा की स्थिति कुछ वैसी ही है, जिस प्रकार से सीएम हेमंत ने पिछड़ों का आरक्षण, सरना धर्म कोड, खतियान आधारित नियोजन और स्थानीय नीति का मोर्चा खोला है, भाजपा की राजनीतिक जमीन उजड़ चुकी हैं, अब इसी राजनीतिक हताशा में ईडी और दूसरे केन्द्रीय एजेंसियों को दौड़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि एक निर्वाचित सरकार की छवि को खराब किया जा सके.

Tags:CM Hemant did not reach ED officepleaded against ED in Supreme Court

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