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अति पिछड़ों की वकालत या भाजपा का खेवनहार, क्या है 'कर्पूरी जनता दल' की राजनीति

BY -
Devendra Kumar CW
Devendra Kumar CW
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 2:38:10 AM

पटना(PATNA)- जदयू के पूर्व एमएलसी रामबदन राय ने 'कर्पूरी जनता दल' का गठन कर अति पिछड़ों को उसका हक दिलवाने की हुंकार भरी है. नयी पार्टी के गठन के साथ ही रामबदन राय ने सीएम नीतीश और लालू प्रसाद को निशाने पर लिया है,  उनका दावा है कि नीतीश लालू ने अपनी तीन दशकों की राजनीति में अति पिछड़ी जातियों की हकमारी की है, और यदि 'कर्पूरी जनता दल' की सरकरा बनी तो वह तो सीएम बनेंगे ही एक दलित और एक अल्पसंख्यक को उपमुख्यमंत्री की कुर्सी दी जायेगी. रामबदन राय ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बिहार के सभी 40 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है. और इसके साथ ही 2025 के विधान सभा चुनाव के बाद अपनी सरकार बनाने का दावा किया है. रामबदन राय का दावा है कि अतिपिछड़ा वर्ग में जो 114 जातियां है, उनकी बिहार में 46 फीसदी आबादी है. जबकि उनके हिस्से आरक्षण मात्र 18 फीसदी है. जबकि नीतीश और लालू की जोड़ी ने तेली और दांगी जैसी मजबूत सामाजिक आधार वाली जातियों को भी अतिपिछड़ों की सूची में शामिल कर दिया है.

एक सच यह भी है

इन आंकड़ों को देखकर कोई भी यह समझ सकता है कि वाकई बिहार मे अति पिछड़ों के साथ बिगत तीन दशकों की राजनीति में बड़ी हकमारी हुई है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि अति पिछड़ी जातियों में जो आज जमीन स्तर पर नेतृत्वकर्ता दिखलाई पड़ रहे हैं, उसकी पूरी खेप नीतीश कुमार के द्वारा पंचायत और नगर निकाय चुनाव में अति पिछड़ी जातियों को आरक्षण प्रदान करने के बाद तैयार हुआ है, आज हजारों की संख्या में इन जातियों का मुखिया-सरपंच हैं, और नगर निकायों में पर्याप्त भागीदारी है, क्या पंचायत चुनाव में आरक्षण के पहले यह तस्वीर दिखलाई पड़ती थी. फिर अति पिछड़ों की इस कथित दुर्दशा के लिए नीतीश कुमार को जिम्मेवार बताया जाना किस सीमा तक उचित है, रही बात 46 फीसदी आबादी के बावजूद 18 फीसदी आरक्षण की, तो जातीय जनगणना तो इसी का उपचार है. एक बार उसका आंकड़ा सामने आ जाता है, तो हर सामाजिक समूह की हिस्सेदारी और भागीदारी का सवाल हल हो जायेगा और इसकी पहल भी सीएम नीतीश की ओर से ही आया है.

अति पिछड़ों की वकालत और निशाने पर सीएम नीतीश

तो फिर रामबदन राय के दावे में कितना दम है और सवाल यह भी है कि रामबदन राय को सामने रख कर राजनीति कहीं और से तो नहीं की जा रही है, क्योंकि इन अतिपिछड़ी जातियों का सबसे ज्यादा भरोसा यदि किसी एक राजनेता पर है तो वह सीएम नीतीश कुमार है. तब क्या यह नहीं माना जाय कि 'कर्पूरी जनता दल' को घोषित उद्देश्य भले ही अति पिछड़ों को उनका हिस्सा दिलवाना हो, लेकिन निशाने पर सीएम नीतीश है, यह उनके आधार मत को  विभाजित करने की सुनियोजित राजनीति का हिस्सा है.

भाजपा का खेल

यही कारण है कि ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों को रामबदन राय के पीछे भाजपा खड़ी नजर आती है, उनका दावा कि रामबदन राय की इस गाड़ी में तेल भाजपा की है, ताकि किसी प्रकार से अतिपिछड़ों मतों में भ्रम की स्थिति पैदा की जा सके. और इसके लिए जदयू के ही एक पूर्व सिपहसलार को तोड़ा गया है, अब देखना होगा कि अति पिछड़े इसे किस रूप में लेते हैं. उनकी आस्था नीतीश कुमार के प्रति रहती है या उसका एक हिस्सा रामबदन राय के साथ खड़ा होता है.

Tags:BJP's Khevanhardvocacy of Extremely BackwardKarpoori Janata Dal'Rambadan Raimost backward castesbiharNitish kumar

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