टीएनपी डेस्क(TNP DESK):हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित है, जहां सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है.इस दिन शिवभक्त व्रत रखते है और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भोलेनाथ की पूजा करते है.लेकिन सोमवार का दिन ही भगवान शिव के लिए क्यों चुना गया चलिए आपको बताते है.
पढ़िये पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला था, तो पूरी सृष्टि संकट में आ गई थी.तब भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और संसार की रक्षा की.माना जाता है कि यह घटना सोमवार के दिन से जुड़ी हुई है, इसलिए यह दिन शिवजी को अत्यंत प्रिय माना जाता है.इसके अलावा एक अन्य कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी.उनकी तपस्या सोमवार के दिन ही पूर्ण हुई और भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया.इसी कारण सोमवार को शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है.
पूजा करने से मिलती है सुख, शांति और समृद्धि
धार्मिक मान्यता यह भी है कि सोमवार का व्रत रखने और शिवजी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है. विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती है, जबकि गृहस्थ लोग परिवार की खुशहाली और संकटों से मुक्ति के लिए शिव की आराधना करते है.इस प्रकार सोमवार का दिन केवल एक साप्ताहिक दिन नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और शिव कृपा का प्रतीक माना जाता है. भोलेनाथ की सरल आराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.