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बंगाल का एक ऐसा मंदिर जहां श्मशान में भी पनपती है आस्था, जानिए क्या हैं इस मंदिर के रहस्यमय पहलू

BY -
Priya Jha CE
Priya Jha CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: June 11, 2025,
Updated: 12:50 PM

TNP DESK: पश्चिम बंगाल के बीरभूम में स्थित एक तारापीठ मंदिर है. ये केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि रहस्य, तंत्र साधना और चमत्कारों का केंद्र भी माना जाता है. मां तारा के इस मंदिर से जुड़ी कई कथाएं भक्तों को यहां से जोड़े रखी है. वहीं ये मंदिर तांत्रिकों को भी वर्षों से आकर्षित करता आया है.

पौराणिक कथा, शिव की गोद में माँ तारा

आपको बताए हिंदू पुराणों के अनुसार, जब सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया था, तब भगवान शिव ने उनके शरीर को उठाकर तांडव करना शुरू कर दिया. वहीं भगवान विष्णु ने सती के शरीर को अपने सुदर्शन चक्र से टुकड़ों में काट दिया ताकि ब्रह्माण्ड को संतुलित किया जा सके. कथाओं के अनुसार सती की आंख और हृदय जहां गिरे, वही जगह बना तारापीठ. उस दिन से इस जगह को लोग तारापीठ नाम से जाने लगे है.

पूजा विधि पारंपरिक नहीं, बल्कि तांत्रिक पद्धति पर आधारित

यह शक्ति पीठ माँ तारा का निवास स्थान माना जाता है, जो काली का रूप हैं. लेकिन यह की खास बात यहां कि पूजा विधि पारंपरिक नहीं, बल्कि तांत्रिक पद्धति पर पूरी तरह आधारित है जो इस मंदिर को सबसे अलग बनाती है.

शव साधना का गुप्त केंद्र

तारापीठ की सबसे रहस्यमयी बात यह है कि यह तांत्रिक साधना, विशेष रूप से शव साधना होता है.मान्यता है कि आज भी यहाँ अघोरी आधी रात में श्मशान में जाकर माँ तारा की कृपा पाने के लिए शवों पर बैठकर साधना करते हैं.यह मंदिर एकमात्र ऐसी शक्ति पीठ है जहाँ श्मशान और मंदिर साथ-साथ स्थित हैं .इसी वजह से इस मंदिर के रहस्यमय बाकी मंदिरों से अलग करता है.

मूर्ति की जीवंत आँखें और माँ की हँसी

तारापीठ की मूर्ति बहुत भव्य और अद्भुत.ये मूर्ति काले पत्थर की बनी है,जहां माँ तारा के होंठों पर रहस्यमयी मुस्कान और उनकी आँखें देख कर जीवंत लगती हैं, जैसे किसी भी क्षण बोल पड़ेंगी.कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से उनकी आँखों में देखता है, उसे दिव्य संकेत या सपना दर्शन होता है.

माँ तारा को पसंद है मांसाहारी भोग

तारापीठ की पूजा की विधि दूसरे मंदिरों से बहुत अलग है. यहाँ माँ को मांसाहारी भोग चढ़ाया जाता है ,जो तांत्रिक पूजा की मुख्य विशेषता है. कई भक्त तो पहली बार में चौंक जाते हैं, लेकिन यही इस मंदिर का विशेष रूप है जो इसे तांत्रिक साधकों के लिए सबसे प्रमुख स्थल बनाता है.

तारापीठ मंदिर एक ऐसा धार्मिक स्थल है जो न केवल पूजा का केंद्र है,बल्कि आत्मा और चेतना के रहस्यों को समझने का एक विशेष जगह है . यहाँ आने वाला हर भक्त न केवल माँ तारा का आशीर्वाद पाता है, बल्कि जीवन के कई धार्मिक रहस्यों से भी रूबरू होता है.

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