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आज चैती छठ में संध्या अर्घ्य पर बन रहा शुभ संयोग, जानें पूजा का समय और नियम

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: March 24, 2026, 11:06:43 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): चार दिवसीय आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. दूसरे दिन खरना की पूजा संपन्न होने के बाद आज तीसरा दिन यानी संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व है. इस दिन व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु की कामना करते हैं. इस बार संध्या अर्घ्य का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि आज पूजा के समय रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है.

खरना के बाद शुरू हुआ कठिन व्रत

महापर्व के दूसरे दिन व्रतियों ने खरना का अनुष्ठान पूरा किया. शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है. यह व्रत अगले दिन उषा अर्घ्य के बाद ही पूरा होगा.

संध्या अर्घ्य का महत्व और समय

आज चैत्र शुक्ल षष्ठी तिथि पर अस्त होते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा. व्रती नदी, तालाब या घाट पर खड़े होकर पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य देव की आराधना करते हैं.

पूजा की विधि और सामग्री

छठ पूजा में पारंपरिक प्रसाद का विशेष महत्व होता है. इसमें ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूरी शामिल होते हैं. पूजा में केला, नींबू, गन्ना, नारियल, सिंदूर, अक्षत और दीपक का उपयोग किया जाता है. व्रती पानी में खड़े होकर सूप में सजी सामग्री के साथ सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं और छठी मैया के गीत गाते हैं.

इस व्रत में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है. घर में पूरी तरह सात्विक भोजन बनाया जाता है और लहसुन-प्याज का उपयोग नहीं किया जाता. व्रती जमीन पर सोते हैं और पूरे समय संयम और श्रद्धा बनाए रखते हैं.

महापर्व का समापन 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा. इसके बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा करेंगे.

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