टीएनपी डेस्क(TNP DESK):विश्व भर में हजारों श्री कृष्ण भगवान के मंदिर मिल जाते है लेकिन आज हम जिस कृष्ण मंदिर के बारे में बताने वाले है वह विश्व का सबसे ऊंचा श्री कृष्ण भगवान का मंदिर है.जिसका इतिहास कई सौ साल पुराना है. इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसका निर्माण अज्ञातवास के दौरान महाभारत के पांडवों ने करवाया था.और ऐसी कई वजह है जो इस कृष्ण मंदिर को अपने आप में खास बनाती है जिसके बारे में आज हम आपको बताने वाले है.
पढ़े कहां स्थित है मंदिर
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है यहां भगवान भोलेनाथ के साथ श्री कृष्ण भी विराजमन है. देवभूमि हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित युल्ला कांडा मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है.मंदिर की खासियत यह है कि यहां पर किन्नौरी टोपी से आप अपनी किस्मत के बारे में जान सकते है.वही मंदिर की खुबसूरती की बात करे तो यह झीलों के बीच स्थित है, जिसकी खुबसूरती और ज्यादा बढ़ जाती है.मंदिर की ऊंचाई लगभग 12,000 से 14,000 फीट के बीच है.
पांडवों ने करवाया था निर्माण
मंदिर के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इसका निर्माण अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने करवाया था.मंदिर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ट्रैक के लिए प्रसिद्ध है, जो बर्फ से ढकी चोटियों, हरे-भरे जंगलों और शांत परिदृश्यों से होकर गुजरती है.पहाड़ी इलाके में होने की वजह से मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई से सितंबर का माना जाता है, जब मौसम सुहावना होता है.
जन्माष्टमी के मौके पर बड़ा भव्य मेला लगता है
श्री कृष्ण के इस मंदिर में जन्माष्टमी के मौके पर बड़ा भव्य मेला लगता है जहां लाखों भक्तों की भीड़ होती है.वही यहां पर कनौरी टोपी से भाग्य जानने की भी परंपरा है.जहां झील में भक्त टोपी को फेंकते हैं अगर टोपी नहीं डूबती है तो ऐसा माना जाता है कि भक्त की मनोकामना पूर्ण हो जाती है.
