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नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित, इस मंत्र का करें जाप दूर हो जाएगी सारी बाधा

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:55:52 PM

टीएनपी डेस्क: शारदीय नवरात्रि का आज छठा दिन है. आज छठे दिन देवी दुर्गा के कात्यायनी रूप की पूजा की जा रही है. सच्चे मन से पूरे विधि-विधान के साथ आज देवी कात्यायनी की पूजा करने पर जीवन से सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं. मान्यता है कि, आज देवी कात्यायनी की पूजा कर उनके मंत्र का जाप करने से विवाह संबंधी समस्या दूर होती है और अगर मनचाहे वर की कामना हो तो वो भी पूरी हो जाती है. आज के दिन व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए.

देवी कात्यायनी का स्वरूप

देवी कात्यायनी का स्वरूप बेहद दिव्य और प्रकाशमान है. देवी के माथे पर एक अद्भुत दिव्य तेज विद्यमान है. देवी के चार भुजाओं में क्रमशः दायें तरफ के ऊपरवाले हाथ में अभयमुद्रा और नीचे वाले हाथ वरमुद्रा है. बाएं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले में कमल पुष्प है. लाल, हरे, पीले वस्त्रों में सिंह पर सवार हुए देवी कात्यायनी दर्शन देती हैं.

देवी कात्यायनी की कथा

पुराणों के अनुसार, कात्यायन नाम के एक महर्षि हुआ करते थे, जो माता दुर्गा के बहुत बड़े भक्त थे. ऐसे में माता दुर्गा को अपनी पुत्री के रूप में पाने के लिए महर्षि कात्यायन ने देवी दुर्गा की कड़ी तपस्या की. जिसके बाद माता दुर्गा ने महर्षि के तप से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और उनसे वरदान मांगने को कहा. देवी के दर्शन देने पर महर्षि ने देवी दुर्गा के सामने उनके घर में बेटी के रूप में जन्म लेने की इच्छा जाहीर की. वहीं, उस दौरान तीनों लोकों में महिषासुर का आतंक छाया हुआ था. मनुष्य से लेकर ऋषि-मुनि और देवता सभी असुर के अत्याचार से परेशान थे. ऐसे में त्रिदेवों यानी शिव, ब्रह्मा और विष्णु ने मिलकर अपने प्रकाश से एक देवी की संरचना की. जिनका जन्म महर्षि कात्यायन के घर में हुआ. महर्षि कात्यायन के घर में जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पडा.

नवरात्रि के सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर महर्षि कात्यायन ने सच्चे मन से देवी कात्यायनी की पूजा की. जिसके बाद देवी कात्यायनी ने नवरात्रि की दशमी तिथि यानी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष पर ही महिषासुर का वध किया और तीनों लोक असुर के अत्याचारों से मुक्त हो गए.

ऐसे करें देवी को प्रसन्न

माता कात्यायनी को मीठे में शहद और गुड अति प्रिय है. ऐसे में आज के दिन माता को शहद और गुड चढ़ाना चाहिए. आप चाहे तो शहद और गुड से बने खीर या हलवे का भोग भी माता को अर्पित कर सकते हैं. पुष्प में माता को लाल गुड़हल बहुत प्रिय है. आज के दिन लाल, पीले या हरे वस्त्रों में पूजा करने से माता प्रसन्न होती है.

देवी मंत्र

  • ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
  • या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवद्यातिनी।।

 

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