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नवरात्र: एक ही दिन पूजी जाएंगी मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री, जानें महाष्टमी और महानवमी पूजन का शुभ मुहूर्त

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 2:57:22 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : पूरे भारत में शारदीय नवरात्रि का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है. हिन्दू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का खास महत्व और मान्यता है. नवरात्रि का अर्थ होता है- ‘नौ रातों का समय.’ इस दौरान नौ दिनों तक माता दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. हर साल आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो जाती है और 9 दिन बाद नवमी तिथि के दिन समाप्त हो जाती है. इस साल 3 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्रि का समापन 9 दिन बाद यानी 11 अक्टूबर को कन्या पूजन के बाद हो जाएगा. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का बड़ा महत्व है. कहा जाता है कि, इन दोनों तिथियों पर माता दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने पर भक्तों को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसलिए अष्टमी को महाष्टमी और नवमी को महानवमी कहा जाता है. लेकिन इस साल अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर सभी असमंजस में हैं की आखिर किस दिन अष्टमी और नवमी की पूजा की जाएगी.

दुर्गा महाष्टमी और महानवमी तिथि

नवरात्रि के 9 दिनों के हिसाब से देखा जाए तो महाष्टमी तिथि इस बार 10 अक्टूबर को पड़ रही है. वहीं, हिन्दू पंचांग के अनुसार, गुरुवार 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर महाष्टमी तिथि की शुरुआत हो रही है और शुक्रवार 11 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर इस का समापन हो रहा है.

वहीं, महानवमी तिथि शुक्रवार 11 अक्टूबर को दोपहर के 12 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर शनिवार 12 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 57 मिनट पर खत्म होगा.

महाष्टमी और महानवमी तिथि

इस साल की नवरात्रि में चतुर्थी तिथि में वृद्धि होने के कारण सप्तमी तिथि महाष्टमी के दिन गुरुवार 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर खत्म होगी. उसके बाद ही महाष्टमी की शुरुआत होगी. ऐसे में एक ही दिन सप्तमी और अष्टमी पड़ने पर अष्टमी का व्रत करना शुभ नहीं माना जाता है. वहीं, उदया तिथि के अनुसार, 11 अक्टूबर को ही अष्टमी और नवमी मनाई जाएगी. ऐसे में श्रद्धालु शुक्रवार 11 अक्टूबर को ही अष्टमी का व्रत भी रख सकते हैं.

कन्या पूजन का मुहूर्त

महानवमी के दिन कन्या पूजन करनी चाहिए. कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है. इस दिन 9 कुंवारी कन्याओं को घर में आमंत्रित कर उनकी की पूजा की जाती है. पूजा के बाद उन्हें भोजन करा कर उपहार दी जाती है. इसके बाद उनका आशीर्वाद लें उन्हें विदा कर दिया जाता है. कुंवारी कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन कराने से माता दुर्गा प्रसन्न होती हैं. शुक्रवार 11 अक्टूबर को महानवमी दोपहर 12 बजे के बाद से शुरू हो जाएगी. ऐसे में भक्त 12 बजे के बाद से कभी भी कन्या पूजन कर सकते हैं.

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सारी जानकारी विभिन्न माध्यमों से ली गई है. किसी भी जानकारी के लिए इस क्षेत्र से संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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