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नाग पंचमी 2024: नागों पर दूध चढ़ाने के पीछे की क्या है कहानी, जानें कैसे हुई नाग पंचमी मनाने की शुरुआत

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 1:56:07 PM

टीएनपी डेस्क: सावन के पवित्र महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी (Naga Panchami) मनाया जाता है. हिन्दू धर्म में इसका खास महत्व है. नाग पंचमी का पर्व पूरी तरह से नागों व सांपों के लिए समर्पित है. इस शुभ अवसर पर भक्त मंदिरों में नाग देवता की पूजा करते हैं. सावन महिना भगवान शिव का प्रिय है. इस पवित्र महीने में पड़ने वाले सारे पर्व का बहुत महत्व होता है. ऐसे में नाग पंचमी पर भगवान शिव के गले में विराजमान नाग वासुकी की पूजा करने से काल सर्प और राहू दोष से मुक्ति मिल जाती है. नाग पंचमी पर दूध चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. कई जगहों पर तो नाग या सर्प को दूध भी पिलाया जाता है. लेकिन नाग और सांपों पर आखिर दूध क्यों चढ़ाया जाता है, जबकि कहा जाता है कि दूध सांपों के लिए जहर के समान है. आज 9 अगस्त को नाग पंचमी है. आज के आर्टिकल में जानिए की क्या है  नागों और सांपों पर दूध चढ़ाने के पीछे की कहानी.

ऐसे हुई नाग पंचमी की शुरुआत

पुराणों के अनुसार, अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को अपना राज पाठ सौंपने के बाद पांडव स्वर्ग यात्रा के लिए निकल गए. पांडवों के जाने के बाद द्वापरयुग का अंत हो गया और कलियुग की शुरुआत हो गई. वहीं, राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डंसने से हो गई. नाग के डंसने के कारण राजा परीक्षित की हुई मौत से आहत उनके बेटे जनमेजय ने सांपों से बदला लेना चाहा. इसके लिए उसने पृथ्वी के सभी नागों का खात्मा करने के लिए नाग दाह यज्ञ करना प्रारंभ कर दिया. इस यज्ञ के शुरू होते ही पूरी पृथ्वी की नाग और सांप प्रजाति यज्ञ के हवन कुंड में आकर गिरने से जलने लगे. वहीं, जब इस यज्ञ का पता आस्तिक मुनि को चला तो उन्होंने तुरंत राजा जनमेजय के पास पहुंच कर उन्हें समझा बुझा कर यज्ञ को रुकवा दिया और सारे नाग व सर्प प्रजाति की रक्षा की. उस दिन सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि थी. आस्तिक मुनि द्वारा नागों का जीवन बचाने पर नाग देवता ने वरदान दिया कि, अब से सावन माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर जो भी नागों की पूजा करेगा उसे कभी भी नागदंश (Snake Bite) का डर नहीं सताएगा. बस उस दिन से ही नाग पंचमी मनाने की शुरुआत हो गई.

नागों पर दूध चढ़ाने के पीछे की कहानी

कहा जाता है कि, यज्ञ में बहुत सारे नाग जल गए थे ऐसे में उनके शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए आस्तिक मुनि ने नागों के शरीर पर दूध डाल दिया था, जिससे नागों को राहत मिली थी. इसलिए तब से नागों पर दूध चढ़ाने या दूध से स्नान कराने की परंपरा बन गई और तब से लेकर आज तक भक्त नाग देवता पर दूध चढ़ाते आ रहे हैं. हालांकि, लोगों में यह मिथ्या है की नागों को दूध पिलाना अच्छा होता है जबकि यह गलत है. पुराणों में नागों पर दूध चढ़ाने की परंपरा बताई गई है ना की दूध पिलाने की. दूध नागों के लिए जहर का काम करता है. इसलिए नाग या सर्प को दूध नहीं पिलाना चाहिए. आप नाग देवता की प्रतिमा पर दूध चढ़ा सकते है या दूध से स्नान करा सकते हैं. 

 

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