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यदि आप भी हैं झारखंडी तो ये जरुर देखें, झारखंड में बोली जानेवाली सभी प्रमुख भाषाओं की पूरी जानकारी विस्तार से जानें  

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 9:27:39 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):झारखंड में बहुत सारी भाषाएं बोली जाती है. जिसमें  खोरठा, नागपुरी, कुरमाली, पंचपरगनिया, संथाली, मुंडारी, भूमिज, हो, खड़िया, कुड़ुख आदि शामिल है. लेकिन इन भाषाओं में सबसे ज्यादा लोग हिंदी भाषा बोलते है. मुख्य रुप से बोलचाल में हिन्दी भाषा का ही प्रयोग किया जाता है. लेकिन झारखंड के मूलवासी आदिवासी समाज के विभिन्न समुदाय के लोग पारंपरिक भाषा का ही परिवार और समाज के लोगों से बोलते हैं.

इन सभी भाषाओं की जानकारी विस्तार से इस प्रकार है

वैसे तो झारखंडवासी बहुत सारी भाषाओं को बोलते हैं. लेकिन इसमे खास तौर पर पंचपरगनिया  नागपुरी, कुरमाली, खोरठा, प्रमुख भाषाओं में शामिल है. इसके साथ ही खड़िया, संथाली, भूमिज, मुंडारी हो, कुड़ुख जैसी जनजातीय भाषा को भी लोग बोलते हैं. इन सभी भाषाओं की जानकारी विस्तार से इस प्रकार है.

खोरठा: झारखंड में खोरठा भाषा एक ऐसी भाषा है. जिसे भारत के झारखंड राज्य में बोलनेवाली मगही भाषा की बोली मानी जाती है. उत्तरी छोटानागपुर और संथाल परगना के 13 जिलों में बोली जाती है. जिसमे गिरिडीह, देवघर, पाकुड़, हजारीबाग, कोडरमा, जामताड़ा धनबाद, चतरा, रामगढ़, साहेबगंज, गोड्डा दुमका, और बोकारो में बोली जाती है. इसके साथ ही बिहार राज्य के कुछ जिलों में खोरथा बोली जाती है. जिसमे जमुई, औरंगाबाद, गया और नवादा आता है. खोरठा भाषा लेखनी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है. हर साल 25 दिसंबर को झारखंड क्षेत्र में खोरठा दिवस मनाया जाता है.

नागपुरी: आपको बताये कि नागपुरी झारखण्ड के साथ छत्तीसगढ़, बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में भी बोली जाती है. ये भोजपुरी से मिलता-जुलता होने की वजह से इसको भोजपुरी की उपभाषा भी कहा जाता है. झारखंड में इसको छोटानागपुर में सर्वमान्य माना जाता है. मुख्य रूप से पश्चिम और मध्य छोटा नागपुर पठार के भागों में बोला जाता है. नागपुरी के सबसे पहले कवि रघुनाथ नृपति थे.

कुड़माली: कुड़माली भाषा झारखंड की राजधानी रांची कुछ जिलों सिल्ली, तमाड़, बुंडू, बारंडा, सोनाहातु प्रखण्डों में बोली जाती है. कुड़माली भाषा को पंचपरगनिया के रूप में भी जाना जाता था.

संताली: संताली भाषा झारखंड में रहनेवाल मुंडा परिवार की प्रमुख भाषा है. जिसको असम, झारखंड के आलावा छत्तीसगढ, , बंगाल त्रिपुरा ओड़िशा और बिहार में संताल जनजाति के लोग बोलते हैं. संताली ऑस्ट्रो-एशियाई मुंडा शाखा की एक भाषा है. जो मुण्डारी भूमिज और हो भाषा से संबंधित है. संथाल भारत का मुंडा जातीय की एक मुख्य जनजाति है. ये लोग झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम में निवास करते हैं. जो नेपाल और बांग्लादेश में रहते है. ये मूल रूप से संथाली भाषा को बोलचाल में इस्तेमाल करते हैं.

मुंडारी: झारखंड और देश के अन्य कुछ राज्यों में रहनेवाले मुंडा जनजाति के लोग मुंडारी भाषा बोलते हैं. मुंडा जनजाति के लोगों के प्रमाण वैदिक काल में भी देखने को मिलती है. हिन्दुओं की पवित्र ग्रंथ महाभारत में कौरवों की सेना में मुंडाओं का जिक्र देखने को मिलता है. मुंडारी भाषा उत्तरी मुंडा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड के छोटा नागपुर पठार के लोग बोलते हैं. मुंडारी भाषा का अस्तित्व लगभग 3500 साल पुराना है. लेकिन मुंडारी  की कोई लिपि नहीं है.

भूमिज: झारखंड की भूमिज भाषा ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं के मुंडा परिवार की प्रमुख भाषा है. जो देश में झारखंड राज्य के आलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में  भूमिज जनजाति के लोग बोलते हैं. जो  संताली और हो से संबंध रखता है. यह भूमिज भाषा  भारत में लगभग लगभग एक लाख लोग इसको बोलते हैं. इसको होड़ो  या ठार  भी लोग कहते हैं.

कुड़ुख: कुड़ुख या 'कुरुख' भाषा भारत, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल में बोलीजानेवाली  एक भाषा है. भारत के कुछ राज्यों में इसको मुख्य रुप से बोला जाता है. झारखण्ड के साथ कुड़ुख भाषा मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में रहनेवाले आदिवासी समुदाय के उरांव जनजाति के लोग बोलते हैं. इसकी वजह से इसको 'उरांव भाषा' कहते है. उरांव झारखंड के जंगलों में निवास करनेवाले लोगों का एक विशेष जाति है.  ये जो भाषा बोलते उसे कुदुक भी कहते हैं.

खड़िया: खड़िया ऑस्ट्रो-एशियाई भाषाओं की मुण्डा शाखा के परिवार की एक भारतीय भाषा है. जिसको भारत के साथ नेपाल के क्षेत्रों में लोग बोलते हैं. जो जुआंग भाषा से बहुत मिलता-जुलता भाषा है.

हो: हो भाषा मुंडा परिवार की भाषा से संबंधित भाषा है. जो मुण्डारी और भूमिज भाषा से संबंध रखता है.  हो भाषा झारखंड के साथ  छत्तीसगढ़, असम, पश्चिम, उड़ीसा और बंगाल के आदिवासी समुदाय के लोग बोलते हैं.लेकिन झारखण्ड के सिंहभूम इलाके में अधिक बोलीजानेवाली भाषा है.

रिपोर्ट- प्रियंका कुमारी

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