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Bhai Dooj 2025: क्यों मनाया जाता है भाई दूज? जानिए तिलक का शुभ मुहूर्त और यमराज-यमुना की कथा

BY -
Vinita Choubey  CE
Vinita Choubey CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 5:09:33 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) को मनाया जा रहा है. पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर को रात 8:16 बजे से शुरू होकर 23 अक्टूबर को रात 10:46 बजे समाप्त होगी. इसलिए यह पवित्र त्योहार 23 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा. भाई दूज को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. इस साल भाई दूज पर ग्रहों और नक्षत्रों का उत्तम योग बन रहा है. इस दिन रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा. इन विशेष योगों में बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं.

भाई दूज का पर्व बहन और भाई के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन यदि भाई अपनी बहन के घर जाकर भोजन करता है तो उसकी आयु में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसी दिन चित्रगुप्त पूजा का पर्व भी मनाया जाता है.

भाई दूज तिलक का शुभ मुहूर्त 2025

भाई दूज के दिन तिलक करने का शुभ समय सुबह 5:05 से 8:55 बजे तक रहेगा. इसके अलावा दिन का प्रमुख मुहूर्त 9:12 बजे से 1:26 बजे तक रहेगा. यदि आप दोपहर का मुहूर्त देख रहे हैं तो 3 बजे से 5 बजे तक भी तिलक किया जा सकता है. पंचांग के अनुसार इस दिन शुभ चौघड़िया मुहूर्त इस प्रकार हैं – शुभ (06:27 एएम से 07:51 एएम), लाभ (12:05 पीएम से 01:30 पीएम) और अमृत (01:30 पीएम से 02:54 पीएम). इन शुभ योगों में बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करेंगी.

भाई दूज क्यों मनाया जाता है? जानिए पौराणिक कथा

भाई दूज का संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा हुआ है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार यमराज अपनी बहन यमुना के घर मिलने पहुंचे. यमुना ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, उन्हें स्नान कराया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन परोसा. इस स्नेह और प्रेम से प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया कि जो भी इस दिन अपनी बहन के घर जाकर आदरपूर्वक तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा और उसकी उम्र लंबी होगी. तभी से इस दिन को भाई दूज के रूप में मनाया जाने लगा.

कैसे मनाया जाता है भाई दूज

भाई दूज के दिन बहनें सुबह स्नान करके व्रत रखती हैं और पूजा की तैयारी करती हैं. वे थाली में रोली, चावल, दीपक, मिठाई और नारियल रखती हैं. जब भाई घर आते हैं, तो बहनें उनके माथे पर घी का तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और मिठाई खिलाती हैं. इसके बाद बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं. बदले में, भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं और जीवनभर उनका सम्मान और सुरक्षा का वचन देते हैं.

भाई दूज का त्योहार प्रेम, स्नेह और पारिवारिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक है. यह दिन हमें भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, स्नेह और अपनापन बनाए रखने की प्रेरणा देता है. इस साल 23 अक्टूबर को बन रहे शुभ योग इस पावन पर्व को और भी खास बना रहे हैं.

 

 

 

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