टीएनपी डेस्क(TNP DESK):कहा जाता है कि अगर किसी को कुछ करना हो तो उसके उत्साह और लगन के आगे अर्थिक या शारीरिक कमजोरी आडे नहीं आती है और वह हर लक्ष्य को प्राप्त करता है जिसका उसने सपना देखा है.इस बात को झारखंड की रहने वाली एक बिटिया ने सच कर दिखाया है जिसकी लगन मेहनत और कुछ करने की चाहत उसे राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया है जी हां हम बात कर रहे है फुटबॉल खिलाड़ी अनुष्का कुमारी की.आज अनुष्का कुमारी किसी पहचान की मोहताज नहीं है.आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोग उन्हें पहचान रहे है लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए अनुष्का शर्मा को कितनी ही परेशानी उठाई है लेकिन हार नहीं माना.
मजदूरी करके घर का भरन पोषण करती है मां
अनुष्का शर्मा एक बड़े ही गरीब परिवार से आती है जिनके पिता लंबे समय से बीमार है तो वही माता दिहाड़ी करके घर का भरण पोषण करती है.अनुष्का कुमारी के फुटबॉल खेलने की लगन और मेहनत के बीच कई बार आर्थिक परेशानी आई तो कई बार सामाजिक दबाब झेलना पड़ा, क्योंकि लोग इसका काफी ज्यादा विरोध करते थे.एक तो गरीबी दूसरी परेशान पिता की बीमारी तो तीसरी लड़की होने का दबाव.अनुष्का शर्मा ने इन परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए यहां तक का लक्ष्य पूरा किया और वह हासिल कर लिया जिसकी वह हकदार थी.
काफ़ी प्रेरणादायक है अनुष्का की कहानी
आपको बताएं कि अनुष्का कुमारी झारखंड की रहने वाली एक ऐसी युवा फॉरवर्ड है जो गरीबी से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है, खासकर SAFF U-17 चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित हुई.उनकी कहानी एक मजदूर परिवार से उठकर फुटबॉल के जरिए आगे बढ़ने और अपने परिवार की मदद करने की प्रेरणादायक गाथा है.जिससे हर किसी को सीखना चाहिए और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होना चाहिए.
अपनी कमजोरियों को बनाई ताकत
अनुष्का कुमारी की कहानी एक ऐसी लड़की की है जिसने अपनी कमजोरियों को ताकत बनाई और आगे बढ़ती गई.कभी नंगे पांव मैदान में दौड़ने वाली अनुष्का आज देशभर की बेटियों के लिए मिसाल बन चुकी है. सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और सामाजिक दबावों के बावजूद अनुष्का ने फुटबॉल को अपना हथियार बनाया और उसी के दम पर अपनी पहचान गढ़ी.
आज हर लड़की देख सकती है आगे बढ़ने का सपना
साधारण दिखने वाली लड़की ने ऐसा असाधारण काम किया है कि बरसों लोग उसकी मेहनत और काबिलियत की मिसाल देंगे.अनुष्का कुमारी ने फुटबॉल को आगे बढ़ने का जरिया बनाया और इतनी मेहनत की किया कि धीरे-धीरे अनुष्का ने जिला और राज्य स्तर पर अपनी पहचान बना ली. सीमित साधनों के बावजूद उनका प्रदर्शन इतना दमदार रहा कि चयनकर्ताओं की नजर उन पर पड़ी.अनुशासन, फिटनेस और खेल की समझ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई. आज अनुष्का देश की उभरती फुटबॉल खिलाड़ियों में गिनी जाती है.
अनुष्का कुमारी की कहानी लड़कियों को करती है प्रेरित
अनुष्का कुमारी केवल फुटबॉल में गोल नहीं करतीं, बल्की ऐसा गोल सेट किया है कि आज हर छोटे बड़े शहरों में या ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली बेटियां आगे बढ़ने का सपना देख सकती है.इनकी प्रेरणादायक कहानी को सुनकर और पढ़कर हर उस बेटी की उम्मीद जगी है जो कभी आर्थिक तो कभी सामाजिक दबाव की वजह से अपने सपने को मार देती है या दबा देती है. उनकी कहानी बताती है कि हालात चाहे जैसे हो, अगर हौसले मजबूत हों तो मैदान छोटा नहीं पड़ता.
