TNP desk. देश में मेडिकल टूरिज्म को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित करने का प्रस्ताव रखा है. इन हब के निर्माण में निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता रहेगी, ताकि आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार तेजी से किया जा सके. सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक स्तर पर मेडिकल टूरिज्म के एक मजबूत केंद्र के रूप में उभरेगा.
इन मेडिकल हब में अत्याधुनिक हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे. इन कॉम्प्लेक्स में आयुष केंद्रों की स्थापना की जाएगी, जहां पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही डायग्नोस्टिक सेवाएं, पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन केंद्र भी विकसित किए जाएंगे. इससे मरीजों को इलाज से लेकर स्वस्थ होने तक सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी.
सरकार का कहना है कि इन पहलों से न केवल देशी और विदेशी मरीजों को लाभ मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ, थैरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए बड़ी संख्या में नौकरियां सृजित होंगी. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
मेडिकल टूरिज्म नीति के तहत प्राचीन भारतीय योग पद्धति और आयुर्वेद पर विशेष जोर दिया जाएगा. भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है. ये संस्थान शिक्षा, शोध और उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
सरकार का मानना है कि योग और आयुर्वेद न केवल इलाज के विकल्प हैं, बल्कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में भी कारगर साबित हो सकते हैं. इन संस्थानों के माध्यम से आयुर्वेदिक चिकित्सा, रिसर्च और प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती मिलेगी.
कुल मिलाकर, मेडिकल टूरिज्म, आयुष, योग और आयुर्वेद को केंद्र में रखकर की गई ये पहलें भारत को वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही हैं.
