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बंगाल: तृणमूल संगठन को फिर से "ताकत" देने के लिए क्या "भतीजे के कद" से समझौता कर सकतीं है ममता बनर्जी

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 25, 2026, 4:30:58 PM

TNP DESK- पश्चिम बंगाल में 4 मई  के बाद बहुत कुछ बदल गया है.  भाजपा आज की तारीख में 208 विधायक के साथ सरकार में है.  15 साल शासन करने वाली ममता बनर्जी की पार्टी सत्ता से बाहर हो गई है.  केवल 80 सीट उसे मिला है, लेकिन ममता बनर्जी का "फाइटिंग स्पिरिट " अभी कम नहीं हुआ है.  सूत्रों ने दावा किया है कि ममता बनर्जी बहुत जल्द हार मानने वाली नहीं है.  वाम दल  के 34 साल का शासन खत्म करने वाली ममता भले ही 2026 में चुनाव हार गई है ,लेकिन वह एक बार फिर अपनी पार्टी को सक्रिय करने में जुट गई हैं.  सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में बदलाव शुरू कर दिया है.  

तेज -तर्रार नए चेहरों को संगठन में मिल रही जवाबदेही 

तेज -तर्रार नए चेहरों को नई-नई जिम्मेवारी दी जा रही है.  राजनीतिक पंडित इसे ममता बनर्जी की "लड़ाकू छवि"  के  चश्मे से देख रहे हैं.  जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्री मदन मित्रा  को दमदम लोकसभा संगठात्मक  जिले का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.  इसके साथ ही श्रीदीप दास को दक्षिण कोलकाता तृणमूल यूथ  कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है.  पार्टी के इस पहल को संगठन को फिर से मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.  वैसे तो विधानसभा चुनाव में बड़ी पराजय के बाद तृणमूल  कांग्रेस लगातार संगठन  पर ध्यान केंद्रित किया है.  15 साल के शासन में संगठन में, जो गड़बड़ियां पैदा हुई हैं ,उन्हें   धीरे-धीरे साफ किया जा रहा है.  ममता बनर्जी लगातार कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रही हैं.  वह कह रही है कि भाजपा का शासन होने से बंगाल में डर का माहौल कायम हो गया है.  यह बंगाल के लिए अच्छी बात नहीं है. 

ममता बनर्जी लड़ सकती हैं नंदीग्राम उपचुनाव 
 
इस बीच सूत्र दावा कर रहे हैं कि ममता बनर्जी नंदीग्राम उपचुनाव में  उम्मीदवार हो सकती हैं.  बंगाल के मुख्यमंत्री नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगह से चुनाव जीते हैं और नंदीग्राम सीट  को उन्होंने छोड़ दी है.  ऐसे में ममता बनर्जी फिर से एक बार नंदीग्राम सीट से अपनी किस्मत आजमाने की राह ढूंढ रही हैं.  वैसे 2021 में वह सुभेंदु  अधिकारी के हाथों  नंदीग्राम सीट हार गई थी.  फालता  विधानसभा सीट से भी करारी हार के बाद ममता बनर्जी थोड़ी परेशान जरूर हैं , लेकिन कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रही हैं.  वह तो केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर रही है और कह रही है कि विपक्षी एकता को एक बार फिर से ताकत देकर केंद्र सरकार को सत्ता से हटाने का काम करेंगी। वैसे उनके भतीजे  और सांसद अभिषेक बनर्जी फिलहाल निशाने पर हैं.  संगठन में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते कद को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं.  ऐसे में ममता बनर्जी ऐसा कौन सा कम उठाएंगी ,जिससे  सांप भी  मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे, यह देखने वाली बात होगी।

Tags:West Bengal BJP GovernmentMamata Banerjee FightbackBengal Political CrisisBJP vs Mamata BanerjeeMamata Banerjee Comeback PlanBengal Political Battle

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