“आदिवासी के पॉकेट में एक हजार नहीं होता और हड़प लिया करोड़ों की जमीन” पर सियासत तेज, झामुमो का दावा आदिवासियों को अपमानित करने पर उतारु है भाजपा

    “आदिवासी के पॉकेट में एक हजार नहीं होता और हड़प लिया करोड़ों की जमीन” पर सियासत तेज, झामुमो का दावा आदिवासियों को अपमानित करने पर उतारु है भाजपा

    Ranchi-भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक के बयान पर झारखंड की सियासत में एक नया बवाल खड़ा होता दिखने लगा है. भाजपा महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने अजय आलोक के बयान को आदिवासी समाज का अपमान बताते हुए दावा किया है कि लोकसभा चुनाव में अपनी हार को सामने खड़ा देख कर अब भाजपा अपना होशो-हवास खोती दिख रही है. आदिवासी समाज का अपमान करने पर उतारु हो गयी है. जिन्हे आदिवासी समाज की संरचना और उनकी जिंदगी के बार में बेसिक समझ नहीं है, उन्हे झारखंड के किसी आदिवासी बहुल गांव में जाकर कुछ समय व्यतित करना चाहिए. जिन शहरों में रहकर कर हम अपने आप को सभ्य समझते हैं, उसकी नींव इसी श्रमशील समाज के लहू और पसीने से रची गयी है. जिस रांची शहर में आज हम खड़े हैं, उस शहर को गढ़ने में भी आदिवासियों की अहम भूमिका है. इस शहर के निर्माण में उनका खून पसीना लगा है. जिस रिम्स में आज हजारों लोगों की चिकित्सा होती है, लाखों लोगों को जिंदगी मिलती है. उसकी बिल्डिंग खड़ा करने वाला भी आदिवासी समाज है. लेकिन भाजपा की यह सोच नई नहीं है, आदिवासी राष्ट्रपति के प्रति भी इनका यही रवैया है. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति को अपमानजनक परिस्थितियों से गुजरना पड़  रहा है. राष्ट्रपति सामने खड़ा रहती है और प्रधानमंत्री कुर्सी पर बैठकर हंसी-ठिठोली करते हैं. यह एक अपमान नहीं तो और क्या है.

    क्या था अजय आलोक का बयान

    ध्यान रहे कि भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने अपने एक बयान में कहा था कि जिस आदिवासी समाज के पास पॉकेट में एक हजार का नोट नहीं होता, उस समाज से आने वाले एक आदिवासी सीएम के द्वारा करोड़ों की जमीन हड़पी जाती है, और इसके बाद झारखंड में सियासत गर्म होती दिखने लगी. वार-प्रतिवार का खेल शुरु हो गया. अपने-अपने सियासी हिसाब और लाभ-नुकसान के अनुसार बयान के मतलब तलाशे जाने लगें. सबकी नजर आने वाले चुनाव पर है. जहां भाजपा की कोशिश भ्रष्टाचार को झारखंड का सबसे बड़ा सियासी मुद्दा बनाकर पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी को जायज ठहराने की है, वहीं दूसरी ओर झामुमो की रणनीति हेमंत की गिरफ्तारी को आदिवासी-मूलवासी समाज के बीच एक सियासी मुद्दा बनाने की है. इस बीच  जैसे ही भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने यह बयान दिया, झामुमो को बैठे बिठाये एक मुद्दा मिल गया. अब देखना होगा कि अजय आलोक के बयान से खड़ा हुआ यह सियासी बवाल चुनावी अखाड़े में कौन सा रंग खिलाता है, और चुनावी परिणाम पर इसका क्या असर दिखने को मिलता है.

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