रांची में मजदूरी कर रहा था युवक,पुलिस ने गांव में उसकी हत्या के आरोप में 3 दोस्तों को भेज दिया जेल, जानिए फिर क्या हुआ
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रांची(RANCHI): एक चौकाने वाला मामला सामने आया है. जिसमें पुलिस की अनुसंधान और झूठी जांच की कलई खुल गई. रांची में मजदूरी कर रहे युवक की हत्या की रिपोर्ट तैयार कर तीन दोस्तों को जेल तक भेज दिया और केस को क्लोज कर दिया. लेकिन जब दो माह बाद वह घर पहुंचा तो पुलिस की सारी पोल खुल गई और अब फजीहत होने लगी. आखिर कोर्ट में क्या जवाब देंगे. सबसे बड़ा सवाल आखिर पुलिस पर गाँव का आदिवासी कैसे भरोसा करेगा. अब वह जेल से आएगा तो क्या करेगा. कौन सा रास्ता चुनेगा.
चलिए पूरी खबर बताते है. मामला छत्तीसगढ़ के जशपुर का है.जिले के कई युवक एक साथ रोजगार की तलाश में झारखंड आए. रांची एमन स्टेशन से उतरने के बाद इस ग्रुप से एक युवक बिछड़ गया. उसके पास मोबाईल फोन भी नहीं थे और ना ही पैसे की वह वापस जाए. कुछ दिन रांची में भटकता रहा. इसी में कई दिन गुजर गया. इसी बीच उसे कुछ लोग मिले वह उसे काम के लिए गिरीडीह लेकर गए. गिरीडीह में मजदूरी करने लगा.ऐसे में दो माह का समय गुजर गया.
इस बीच जब घर वालों को उसका कोई सुराग नहीं मिला. तो घर के लोगों ने कोतवाली थाना में मुकदमा दर्ज करा दिया. लापता होने का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू किया. इस बीच ही क्षेत्र में एक लाश मिली. जिसे पुलिस ने सीमित खखा का शव समझ कर परिवार के लोगों को सौप दिया.और घर वाले भी उस शव को सीमित खाखा का समझ कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली.
अब पुलिस ने इस शव सीमित का माना और जांच शुरू कर दी. जिसमें सीमित के दिन दोस्तों को हिरासत में लिया. फिर पूछताछ की गई और तीनों को हत्या के मामले में जेल भेज दिया. पुलिस ने इस पूरे कथित हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि पैसे को लेकर विवाद हुआ था. इसी में दोस्तों ने उसकी हत्या कर दी. और एक केस खत्म हो गया. लेकिन कहानी अभी शुरू हुई थी.
इस घटना के 61 दिन बात 22 दिसंबर को सीमित खाखा अपने गाँव पहुंचा.जिसे देख हर कोई चौक गया. आखिर मरा हुआ शख्स कैसे लौट आया. घर वाले को भी विश्वास नहीं हो रहा था. लेकिन आखिर में उन्हे विश्वास हुआ और फिर पुलिस थाने पहुंच गए. जहां खुद के जीवित होने का सबूत दिया और कहा कि उसके दोस्त निर्दोष है.
उसने पुलिस को बताया कि वह झारखंड में था और कमाने गया था. उसके पास कोई घर का कॉन्टेक्ट नंबर नहीं था की वह फोन कर सके.
अब पुलिस के लिए फजीहत हो गई. आखिर जिस व्यक्ति कि हत्या के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था वह खुद थाना पहुंचा है. यहां पर पुलिस की जांच और अनुसंधान पर भी सवाल खड़ा होने लगा. आखिर निर्दोष तीन युवक जेल में बंद है. अब वह बाहर भी निकलेंगे तो एक दाग ज़िंदगी भर रहेगा. जिसमें हत्या के संगीन मामले का आरोप कैसे हटेगा यह सोचने वाली बात है.
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