श्रावण सोमवारी का प्रथम अभिषेक! बोल-बम के जयकारों से गूजा रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर

    श्रावण सोमवारी का प्रथम अभिषेक! बोल-बम के जयकारों से गूजा रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर

    रांची (RANCHI): श्रावण का महीना हो और सोमवारी पर शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है. श्रावण मास में सोमवारी पूजा का विशेष महत्व है. ऐसे में रांची के पहाड़ी मंदिर में भी आज शिव भक्तों की भीड़ देखने को मिली. लगभग दो सालों तक भोलेनाथ और उनके चाहने वालों  के बीच दूरी बनी रही. लेकिन इस साल बाबा के पट भी खोले गए और श्रद्धालुओं ने शिवशंभु पर जलाभिषेक भी किया. सावन महीने में पहाड़ी मंदिर में ठीक वैसी ही भीड़ रहती है, जैसी की देवघर के बाबा मंदिर में. जो लोग वहा तक नहीं जा सकते, वे रांची के पहाड़ी बाबा के ही दर्शन मात्र से प्रसन्न हो उठते हैं. यही कारण है कि सावन की पहली सोमवारी के अवसर पर यहां  श्रद्धालुओं की अपास भीड़ देखी गई. इसमें पुरुष, महिला, वृद्घ और बच्चे सभी शामिल रहे. कोई मन में मनोकामना लेकर बाबा के शरण में पहुंचे तो कोई इच्छा पूर्ति पर बाबा को शुक्रिया आदा करने मंदिर पहुंचा. कोई नंगे पैर करीबन चौर सौ सीढ़ियां चढ़कर बाबा के पास पहुंचा, तो कोई श्रद्धालु अपने घुटनों पर चलकर बाबा के दरबार में पहुंचा.

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    होगी महाआरती

    एतिहासिक पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए रविवार की रात से ही पहुंचने लगे थे. रात भर लाइन में लगकर श्रद्धालुओं ने सुबह बाबा के पट खुलने का इंतज़ार किया. और अहले सुबह चार बजे पट खुलने के बाद बाबा पर जर्लापण किया. यहां 3:30 बजे सबसे पहली सरकारी पूजा की गई. वहीं संध्या के समय 5:30 बजे महाआरती का आयोजन किया जाएगा.

    स्वर्णरेखा नदी से जल भर कर भक्त पहुंचेंगे पहाड़ी मंदिर

    पहाड़ी मंदिर में जलाभिषेक के लिए रांची ही नहीं, दूसरे जिलो से भी लोग आते हैं. देवघर के बाद सबसे अधिक भीड़ यहीं भक्तों की उमड़ती है. पहाड़ी बाबा के जलाभिषेक के लिए भक्त चुटिया के स्वर्णरेखा नदी से जल भर कर लाते हैं. रविवार रात 10 बजे से ही भक्तों ने स्नान और जल उठाया. स्वर्णरेखा नदी से जल भरने के बाद भक्त पैदल चलकर पहाड़ी मदिर पहुंचे. इसके बाद 468 सीढ़ियां चढ़ कर भक्तों ने बाबा का दर्शन और जलाभिषेक किया.

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