पुरी में ही नहीं, रांची के इस मंदिर में भी बसते है भगवान जगन्नाथ, जानें रांची का 300 साल पुराना मंदिर का इतिहास

    पुरी में ही नहीं, रांची के इस मंदिर में भी बसते है भगवान जगन्नाथ, जानें रांची का 300 साल पुराना मंदिर का इतिहास

    TNP DESK (टीएनपी डेस्क): झारखंड के राजधानी में स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक कला का भी एक बड़ा उदाहरण है. बताते चलें कि यह मंदिर रांची से लगभग 10 किलोमीटर दूरी पर स्थित है. मंदिर एक छोटी पहाड़ी की चोटी पर है. यह पहाड़ धुर्वा डैम से कुछ ही दूरी पर है. मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है और उड़ीसा के प्रसिद्ध पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज़ पर बना हुआ है.

    मंदिर में झलकता है इतिहास 

    रांची के जगन्नाथ मंदिर का स्थापना साल 1691 में नागवंशी राजाओं द्वारा करवाया गया था. इस मंदिर की स्थापना राजा ठाकुर अनंत नाथ शाहदेव ने की थी.जैसा कि हम सब जानते है भगवान जगन्नाथ को विष्णु का अ‍वतार माना गया है. मंदिर में भगवान जगन्नाथ बहन सुभद्रा और भैया बलराम के साथ विराजमान हैं. यह मंदिर काफी भव्य है. पहाड़ों पर स्थिति यह मंदिर एक समय नागवंशी साम्राज्य की धार्मिक गतिविधियों का जगह हुआ करता था. 

    रथ यात्रा मंदिर का विशेष आकर्षण

    रांची जगन्नाथ मंदिर में हर साल आषाढ़ के महीने में मंदिर से रथ यात्रा निकाली जाती है, और यहां यात्रा सबसे प्रसिद्ध धार्मिक घटना है. यह यात्रा पुरी की रथ यात्रा जैसी ही होती है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों को विशेष रूप से सजाए गए रथ में बैठाकर मंदिर परिसर में घुमाया जाता है. लाखों श्रद्धालु इस दिन मंदिर दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.

    पर्यटन और श्रद्धा का केंद्र

    रांची का यह प्रसिद्द मंदिर न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है. यहां का खास बात है यह का शांत वातावरण, आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक महत्व इसे रांची की पहचान बनाते हैं.

    मंदिर तक कैसे पहुँचें

    रांची रेलवे स्टेशन से यह मंदिर लगभग 10 किलोमीटर दूर है.यहाँ तक टैक्सी, ऑटो या आपने निजी बाइक या कार से भी पहुँचा जा सकता है.वही इसके करीब एयरपोर्ट बिरसा मुंडा एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

    रांची का जगन्नाथ मंदिर केवल न एक पूजा स्थल है,बल्कि यह हमारी संस्कृति, इतिहास और श्रद्धा का जीता-जागता प्रतीक है.अगर आप झारखंड घूम रहे है, तो यह मंदिर जरूर जाएं.


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