झारखंड के पलामू में नवरात्रि में लगता है भूत मेला, सरेआम चल रहीं ओझा गुनी की दुकानें

    झारखंड के पलामू में नवरात्रि में लगता है भूत मेला, सरेआम चल रहीं ओझा गुनी की दुकानें

    पलामू (PALAMU ) :  हवन कुंड के सामने झूमते लोग, खुले बालों में अजीब सी भाव भंगिमा लिए नाचती महिलाएं, इस दौरान नन्हें-मुन्ने बच्चों को हवा में उछालते महिला पुरुष, तेज स्वर में मंत्र पढ़ते हुए तांत्रिक विधान करते ओझा-गुनी. इनदिनों यह नजारा दिखता है पलामू के हैदरनगर देवी धाम पर. यहां चैत नवरात्र और शारदीय नवरात्र में भव्य मेला लगता है जहां कई प्रदेश से श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. यहां आस्था और अंधविश्वास का मेल देखने को मिलता है. लोगों का मानना है कि यहां मनोकामना तो पूरी होती ही है, बुरी आत्माओं से ग्रसित लोगों का उपचार भी होता है. 

    सरेआम चल रही बाहर से आए ओझा गुनी की दुकानें

    तमाम उपलब्धियों के बावजूद झारखंड को नीचले पायदान पर लाने में यहां के बारे में प्रचलित कुछ धारणाएं दोषी हैं तो यहां की कुछ घटनाएं भी समान जिम्मेदार हैं. एक ओर डायन बिसाही जैसे मामले, वहीं भूत-ओझा-गुणी का खेल भी देश-दुनिया के नक्शे पर झारखंड की छवि को खराब करता है.  इन दिनों हैदरनगर देवी धाम की एक तस्वीर की सूबे में ही नहीं, देश और राज्य स्तर पर चर्चा में हो रही. इस तस्वीर में धाम कुछ लोग हवन कुंड के पास झूमते हुए नजर आ रहे. कहा जाता है कि उनके ऊपर प्रेत आत्मा का वास है. बाहर से आए ओझा गुनी उन्हें अपने तंत्र मंत्र से और देवी मां की आराधना से ठीक करने का दावा करते हैं. ऐसे ओझा गुनी की दुकान सरेआम चल रही.

    बिहार के जम्होर से लाई गई प्रतिमा

    हैदरनगर देवी धाम पर देवी मां की प्रतिमा बिहार के जम्होर से लाई गई है. कई दशक पूर्व स्थापित की गई है. इस मंदिर के संचालन करने वाले लोगों के पूर्वजों ने यहां पर मां की प्रतिमा को स्थापित किया है. तब से यहां पर देवी मां की पूजा होती है और हर साल मेला लगता है. मेला भी भूत मेला के नाम से चर्चित हो गया है. मंदिर के पुजेरी अमित कुमार की माने तो यहां मांगी की कोई भी मनोकामना जरूर पूरी होती है. खासकर संतान प्राप्ति के लिए भी लोग मनोकामना करते हैं. श्रद्धालु राकेश कहते हैं कि यहां मनोकामनाएं पूरी होती है, इसलिए हर साल यहां आता हूं.

    बहरहाल,  पलामू की यह तस्हवीर बताती है कि हमारे देश में आज भी आस्था के आगे अंधविश्वास का खेल चलता रहता है. हैदरनगर देवी धाम की भी कुछ ऐसी ही कहानी है. दरकार यह देखने की है कि ओझा गुनी की दुकानों में किसी मासूम का विश्वास ना लुट जाए. किसी की आस्था उसके जीवन पर भारी न पड़े. धर्म के नाम पर कोई जिंदगी की पूंजी पर डाका नहीं डाल सके.


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