धनबाद में 24 घंटे सुई से लेकर दवाई तक मिलना क्यों बन जाएगा इतिहास, क्यों ऐसा होने जा रहा!


धनबाद(DHANBAD) | धनबाद में एक जगह ऐसा भी है, जहां दिन हो या रात, 24 घंटे सुई से लेकर दवाई तक मिलती है. लेकिन अब यह इतिहास बन जाएगा। धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर की दुकान अब टूट जाएंगी। धनबाद में नए रेलवे स्टेशन का मास्टर प्लान तैयार हो गया है. धनबाद से होकर गुजरने वाली ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की नई रेल लाइन धनबाद रेलवे स्टेशन के बाहर की सूरत बदल देगी। धनबाद स्टेशन के बाहर 24 घंटे चलने वाली दुकाने अब अतीत बन जाएंगी। मास्टर प्लान बनाकर तैयारी के लिए मुख्यालय को भेजा गया है. स्टेशन के अगल-बगल रेलवे के कई कार्यालय भी स्थानांतरित हो जाएंगे। कुछ पुल भी टूटेंगे, मास्टर प्लान में इस बात का जिक्र है कि रेलवे स्टेशन के शॉपिंग कांप्लेक्स के बगल में रेलवे के कई पुराने कार्यालय भी तोड़ दिए जाएंगे। इन कार्यालयो को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।
पार्सल कार्यालय भी अब दूसरी जगह शिफ्ट हो सकता है ---
पार्सल कार्यालय भी अब दूसरी जगह शिफ्ट हो जाएगा। धनबाद में 24 घंटे दुकान चलना धनबाद की पहचान बन गई थी. धनबाद स्टेशन के बाहर दिन में तो भीड़भाड़ रहती ही है, रात में भी यहां लोगों का जुटान रहता है. दरअसल, धनबाद होकर गुजरने वाली अधिकांश मुख्य ट्रेन रात को हैं. इस वजह से भी यहां दिन के बजाय रात को यात्रियों की आवाजाही अधिक होती है. इस वजह से धनबाद स्टेशन पर उतरने वाले यात्री कहीं से भी आते हैं, तो चिंता मुक्त होकर आते हैं कि बाहर निकलते ही उन्हें जरूरत की सरे सामान उपलब्ध हो जाएंगे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। धनबाद स्टेशन परिसर को देखने और जानने वाले जानते हैं कि इन दुकानों की भी एक अलग कहानी है. स्टेशन रोड से रांगाटांड़ के एक तरफ दुकान लगी रहती हैं. फल की दुकान से लेकर दवा की दुकानो में सब कुछ की खरीद और बिक्री होती है. रात में अगर आपकी गाड़ी बिगड़ जाए, तो उसके मिस्त्री भी यहां मिल जाते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
24 घंटे चलने वाली इन दुकानों का क्या इतिहास है---
हालांकि 24 घंटे चलने वाली इन दुकानों का भी एक इतिहास है. पुराने लोग बताते हैं कि धनबाद के डीसी जब जेएस बरारा हुआ करते थे, तो स्टेशन रोड की दुकाने सड़क की बाईं ओर लगती थीं. इस वजह से जाम की स्थिति पैदा होती थी. उन्होंने अतिक्रमण हटाने का प्रयास शुरू किया, तो विवाद बढ़ गया. जब अतिक्रमण हटाने की तिथि तय हुई तो दुकानदारों ने रातों-रात वहां शंकर जी का एक मंदिर का निर्माण करा दिया। उनको भरोसा था कि मंदिर की वजह से दुकाने नहीं हटेगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। प्रशासन ने मंदिर को यूं ही छोड़ दिया और दुकान हटवा दी. इसके बाद दुकानदारों ने धनबाद के पूर्व सांसद योगेश्वर प्रसाद योगेश, जो उस समय बिहार में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर थे, उनसे संपर्क किया।
बिहार सरकार की पहल पर आवंटित हुई थी दुकानें ----
फिर बिहार सरकार रेलवे से बातचीत का सिलसिला शुरू किया और दुकानदारों को रोड की दाहिने तरफ दुकान आवंटित हुईं। उसके बाद से दुकान चल रही है, हालांकि कुछ साल पहले इन दुकानों को हटाने का प्रयास हुआ था. लेकिन दुकानदार आवंटन का हवाला देकर दुकान खाली करने से इनकार कर दिया था. उस समय मामला दब गया, लेकिन अब मास्टर प्लान में दुकान हटाने का जिक्र है. और इसका कारण ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बताया जाता है. धनबाद रेलवे स्टेशन झारखंड का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है. यहां हावड़ा से दिल्ली रूट पर रेल गाड़ियों की भरमार है. इस वजह से अमूमन रोज एक लाख यात्रियों की आपाधापी होती है. अब देखना होगा कि मास्टर प्लान की मंजूरी मिलने के बाद धनबाद रेलवे स्टेशन की सूरत कितनी बदलती है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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