कोल इंडिया के रिटायर्ड अधिकारी गुस्से में,आरोप -प्रबंधन मेडिकल भुगतान में कर रहा परेशान, अब आगे क्या!


धनबाद(DHANBAD): देश-विदेश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी कोल इंडिया के रिटायर्ड अधिकारी आंदोलन का रास्ता पकड़ सकते है. उनका सबसे अधिक गुस्सा इस बात पर है कि इलाज में हुए खर्च का भुगतान कोल इंडिया स्तर पर 3 महीने तक रोक रखा जाता है. जबकि सहायक कंपनियां के पास 6 महीने तक दौड़ लगानी पड़ती है. इस बात को लेकर रिटायर्ड कोयला अधिकारियों में नाराजगी है. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस परेशानी का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. सेवानिवृत अधिकारियों ने बैठक कर पहले कोल् इंडिया के कार्मिक निदेशक से मिलने का निर्णय लिया है. अगर उसके बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन की घोषणा कर सकते हैं.
मेडिकल बिल के भुगतान में अनावश्यक विलंब का आरोप
रिटायर्ड अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल बिल के भुगतान में अनावश्यक और अधिक विलंब किया जाता है. इलाज में हुए किसी भी खर्च का नियमानुसार भुगतान में कोल इंडिया स्तर पर 3 महीने लगाए जाते हैं, जबकि सहायक कंपनियां 6 महीने तक लगा देती हैं. रिटायर्ड कोयला अधिकारियों की मांग है कि मेडिकल बिल की सीमा 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख किया जाए. उनका तर्क है कि केंद्र सरकार के सभी अस्पतालों का CGHS दर काफी बढ़ा हुआ है. इस वजह से मेडिकल खर्च में अधिक खर्च होता है. जो अधिकारी 10 वर्ष पहले रिटायर्ड हुए हैं, उनकी पेंशन भी काफी कम है. सूचीबद्ध अस्पतालों में भी सेवानिवृत अधिकारियों को परेशानी होती है. मेडिकल स्मार्ट कार्ड भी निर्गत नहीं किया गया है. जिसके कारण परेशानी हो रही है.
पेंशन अमाउंट में तत्काल संशोधन की मांग,और क्या कह रहे
अधिकारियों का कहना है कि जिन अधिकारियों की पेंशन कम है, उसमें तत्काल संशोधन की जरूरत है. ऐसा नहीं होने से कठिनाई हो रही है. उनका कहना है कि प्रकृति के खिलाफ धरती का सीना चीर कर उन्होंने राष्ट्र के उत्थान में अपना सहयोग दिया है. अब जब वह सेवानिवृत हो गए हैं, तो प्रबंधन को उन पर ध्यान देने की जरूरत है. बता दें कि बहुत पहले रिटायर्ड हुए कोयला अधिकारियों की पेंशन हजार रुपए तक है. इस मामले को लेकर कोल् पेंशनर्स एसोसिएशन लगातार आंदोलन कर रहा है. पेंशन की राशि बढ़ाने की मांग कर रहा है, लेकिन कोई एक्शन नहीं हो रहा है. इधर, 10 वर्ष पहले भी रिटायर्ड हुए अधिकारियों ने पेंशन बढ़ाने की मांग कर दी है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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