Coal India :कोयल उद्योग में संशय और हलचल, सवा दो लाख कर्मियों के वेतन समझौता का क्या होगा !


धनबाद (DHANBAD) : कोयला उद्योग में फिलहाल हलचल है. कोयलाकर्मियों में संशय है तो यूनियन भी अपने अस्तित्व को लेकर परेशान हैं. कोयलाकर्मियों का वेतन समझौता 2026 में होगा अथवा इसका स्वरूप बदल जाएगा, इसकी चर्चा तेज है. चर्चा इसलिए भी तेज है कि कोयला वेतन समझौता -11 की अवधि 30 जून 2026 को समाप्त हो रही है. यानी 1 जुलाई 2026 से वेतनमान समझौता -12 का समय शुरू हो जाएगा. सूत्रों के अनुसार कोयला वेतन समझौता -12 शुरू होने से पहले कोयला उद्योग की मान्यता प्राप्त पांचों यूनियन यानी बीएमएस , एचएमएस, इंटक , एटक और सीटू की ओर से कोल इंडिया प्रबंधन को डिमांड भेजा जाएगा। अभी तक की परिपाटी के अनुसार अलग-अलग यूनियन वेतन समझौता से पहले अपना अलग-अलग चार्टर ऑफ डिमांड भेजती रही है. यह अलग बात है कि पिछले दो वेतन समझौता से यूनानियों द्वारा कॉमन चार्टर ऑफ डिमांड भेजा जा रहा है.
केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड पारित किये जाने से संशय
वेतन समझौता -12 के लिए चर्चा इसलिए तेज है कि केंद्र सरकार द्वारा चार लेबर कोड पारित किया गया है और इसमें कोयला वेतन समझौता की बैठक या उसके अन्य इंतजाम का कोई उल्लेख नहीं है. आशंका व्यक्त की जा रही है कि अब कोयला उद्योग में जेबीसीसीआई की जगह वार्ताकार परिषद का गठन किया जा सकता है. इस परिषद में वही यूनियन शामिल हो सकेंगी , जिन्हे काम से कम 20 फ़ीसदी मजदूरों का समर्थन प्राप्त होगा. सूत्र बताते हैं कि 40 फ़ीसदी समर्थन वाली यूनियन के दो पदाधिकारी इसमें शामिल रह सकते हैं, जबकि 51 प्रतिशत या इससे अधिक समर्थन वाली यूनियन नेगोशिएटिंग यूनियन मनी जाएगी और वेतन समझौता पर उसका चलेगा। सूत्रों के अनुसार वर्तमान हालात में अधिकतर यूनियन 20 फ़ीसदी समर्थन जुटा पाएंगी ,इसमें संदेह है. और ऐसी स्थिति में अधिकतर यूनियन वार्ताकार परिषद से बाहर हो सकती है.
जेबीसीसीआई में कितने सदस्य नामित होंगे,इसका फैसला मैनेजमेंट करता रहा है
अब तक की व्यवस्था के अनुसार कोयला उद्योग में मान्यता प्राप्त यूनियन की ओर से जेबीसीसीआई में कितने सदस्य नामित होंगे, इसका फैसला कोल् मंत्रालय करता है. इसके लिए तय तिथि के अंदर यूनियनों को रेगुलर व अल्टरनेट सदस्यों की सूची सरकार को उपलब्ध करानी होती है. जेबीसीसीआई में कोल इंडिया प्रबंधन और मजदूर संगठन के लोग शामिल रहते हैं. यूनियनों के अनुसार कोल इंडिया में घटना मैनपॉवर, बदली हुई व्यवस्था तथा नई वार्ता प्रणाली के बीच कोयला वेतन समझौता -12 को अंतिम रूप देना आसान नहीं होगा. अगर वार्ताकार परिषद की शर्तों से यूनियन अगर बाहर हो जाएंगी तो फिर कोल इंडिया मैनेजमेंट अपने तरीके से निर्णय ले सकता है. कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों में फिलहाल लगभग सवा दो लाख कर्मी है. इन्ही के लिए वेतन समझौता होना है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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