BCCL: आउटसोर्स कंपनियों से कंपनी की कितनी सुधरी आर्थिक स्थिति, कितने पहुंचे फर्श से अर्श पर, अब आगे क्या?

    इस व्यवस्था का परिणाम यह हुआ कि  कंपनी का उत्पादन लगातार बढ़ता गया और कंपनी मुनाफे में आ गई.  फिलहाल बीसीसीएल में भूमिगत खदानें  अब नहीं के बराबर रह गई हैं

    BCCL: आउटसोर्स कंपनियों से कंपनी की कितनी सुधरी आर्थिक स्थिति, कितने पहुंचे फर्श से अर्श पर, अब आगे क्या?

    धनबाद(DHANBAD): बीसीसीएल के आईपीओ से कंपनी को कोई नया पूंजी निवेश नहीं मिलेगा, लेकिन शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से कंपनी की पारदर्शिता, जवाबदेही और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत होगा. भविष्य में विस्तार की संभावना भी बढ़ेगी, नई परियोजनाओं के लिए बाजार से पूंजी जुटाने का  मार्ग भी प्रशस्त हो सकता है.  इनसब को लेकर एक बार फिर पूरे देश में बीसीसीएल की चर्चा है.  यह बात सच है कि बीसीसीएल की एक समय आर्थिक स्थिति खराब थी.  भूमिगत खदानों से कोयले का उत्पादन कास्ट बढ़ रहा था, इसके बाद अधिकृत जानकारी के अनुसार 2005 में बीसीसीएल में आउटसोर्स व्यवस्था शुरू हुई.  

    आउटसोर्स से कंपनी का प्रोडक्शन तो बढ़ गया, लेकिन -

    इस व्यवस्था का परिणाम यह हुआ कि  कंपनी का उत्पादन लगातार बढ़ता गया और कंपनी मुनाफे में आ गई.  फिलहाल बीसीसीएल में भूमिगत खदानें  अब नहीं के बराबर रह गई हैं.  कुछ अत्याधुनिक  खदानें ही हैं.जिनसे  उत्पादन हो रहा है.  बाकि  सब काम आउटसोर्स के भरोसे  चल रहा है.  आरोप लगाए जा रहे हैं कि आउटसोर्स की वजह से   इलाकों में प्रदूषण में बेतहाशा वृद्धि हुई है.  उम्मीद की जा रही थी कि आउटसोर्स हो जाने के बाद कोयले का अवैध   खनन और कोयला चोरी रुक जाएंगे , लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 

    2005 से शुरू हुई आउटसोर्स सिस्टम का आज क्या है हाल 

     बीसीसीएल के सीएमडी  मनोज अग्रवाल सार्वजनिक मंचों से कह रहे हैं कि  कोयला चोरी बीसीसीएल के लिए कोढ़  है.  कोयलांचल की आर्थिक स्थिति यह  बिगाड़ देगा.  सीएमडी  हर स्तर पर कोयला चोरी रोकने के लिए आह्वान  कर रहे हैं.   सूत्रों के अनुसार उन्होंने कोयला चोरी की विस्तृत रिपोर्ट कोयला मंत्रालय को भी भेजी है.  अब कोयला मंत्रालय भी इस पर काम कर रहा है कि कैसे कोयला चोरी को पूरी तरह से रोक दिया जाए.  दरअसल, आउटसोर्स की व्यवस्था 2005 से बीसीसीएल में शुरू हुई और फिलहाल 80% से अधिक कोयले का उत्पादन आउटसोर्स के भरोसे हो रहा है.  यह बात भी सच है कि कोयले के "खेल" में कई लोग फर्श से अर्श  पर पहुंच गए.  कल तक जिनके पास साइकिल और स्कूटर थे, वह आज महंगी और चमचमाती गाड़ियों में घूम रहे है. 

    कोयले के "खेल " में कई फर्श से अर्श पर पहुंच गए ,लेकिन 

     यह सब तो कोयले के  ही "खेल" से ही हो रहा है.  बताया जाता है कि पी एस  भट्टाचार्य जब कोल इंडिया के अध्यक्ष बने तो कोयले की ई -ऑक्शन  व्यवस्था और आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू हुई.  उनका मानना था कि आउटसोर्स होने से कंपनी की सेहत भी सुधरेगी और कोयला चोरी भी रुकेगा।  लेकिन कंपनी की सेहत तो सुधरी लेकिन कोयला चोरी नहीं रुकी।   नतीजा है कि आज सीएमडी    कोयला चोरी की बात को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार रहे हैं.   मतलब साफ है कि मामला गंभीर हो गया है. अब सवाल किया जा रहे हैं कि बीसीसीएल में आउटसोर्सिंग व्यवस्था कितनी कारगर हुई.  कंपनी की सेहत तो जरूर सुधरी लेकिन क्या उसके साथ ही कोयला चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी हो गई? सूत्र तो दावा  कर रहे हैं कि आउटसोर्सिंग कंपनियों में अगर कोयला चोरी रुक जाए तो बीसीसीएल का प्रोडक्शन कम से कम 30% से अधिक पहुंच सकता है. 

    रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  


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