टीएनपी डेस्क(TNP DESK):इन दिनों सोशल मीडिया पर पीएम नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.इस वीडियो में प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार के दौरान एक छोटे से झालमुड़ी के दुकान पर रुककर झालमुड़ी का स्वाद लेते दिख रहे है. वीडियो में देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने काफिले को कुछ देर के लिए रुकवाया और एक स्थानीय दुकानदार से झालमुड़ी खरीदी इस दौरान वे दुकानदार से हल्की-फुल्की बातचीत भी किया है, जिसे लोग काफी पसंद कर रहे है.
10 के नोट ने खींचा सबका ध्यान
वीडियो का सबसे ज्यादा हैरान करनेवाला मोड तब आता है जब प्रधानमंत्री अपनी जेब से 10 रुपये का नोट निकालकर दुकानदार को देते है. यही छोटी-सी बात अब सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का विषय बन गई है. कुछ लोग इस पल को बेहद सरल और जमीन से जुड़े नेता की छवि के रूप में देख रहे है, जबकि कुछ लोग इसे राजनीतिक नजरिए से भी जोड़कर देख रहे है.
डिजिटल पेमेंट के समर्थक PM ने झालमुड़ी वाले को क्यों दिया कैश?
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी लंबे समय से डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा देते रहे है. उनके नेतृत्व में देश में UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम का तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब डिजिटल भुगतान को इतना बढ़ावा दिया जा रहा है, तो फिर उन्होंने नकद पैसे क्यों दिए.क्या देश के इतने बड़े पद पर रहते हुए पीएम दस या बीस का नोट लेकर घुमते है, या उनकी जेब में पहले से प्लानिंग के तहत पैसे रखे गये थे.क्या झालमुड़ी खाना पीएम के चुनाव प्रचार का हिस्सा था.
सरलता या राजनीतिक स्टंड
हालांकि, इस पूरे मामले को एक सामान्य नजरिए से भी देखा जा सकता है. भारत में आज भी छोटे दुकानदारों और ठेला चलाने वाले लोगों के बीच नकद लेन-देन आम बात है. हर दुकानदार के पास डिजिटल पेमेंट की सुविधा हो, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में प्रधानमंत्री का नकद भुगतान करना एक व्यावहारिक कदम भी माना जा सकता है.
वीडियो पर छिड़ी बहस
आपको बताये कि चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं का जनता के बीच जाकर उनसे जुड़ना कोई नई बात नहीं है. छोटे दुकानदारों से बातचीत करना, स्थानीय खाना चखना और लोगों से सीधे संवाद करना, यह सब नेताओं के जनसंपर्क का हिस्सा होता है.इससे आम जनता के बीच एक अपनापन दिखाने की कोशिश भी की जाती है.वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही है.कुछ लोग इसे प्रधानमंत्री की सादगी बता रहे है, तो कुछ इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा मान रहे है.


