नक्सलियों को कौन देता है हाई टेक हथियार और पैसा,क्या है विदेश कनेक्शन 

    नक्सलियों को कौन देता है हाई टेक हथियार और पैसा,क्या है विदेश कनेक्शन 

    रांची(RANCHI): देश में नक्सलवाद आजादी 75 साल बाद भी एक चुनौती के रूप में है.जिसे ख़त्म करने के लिए सुरक्षा बल के जवान जंगल में मोर्चा संभाला कर डटे है.दोनों ओर से हर दिन मुठभेड़ होती है.सैकड़ो राउंड गोली चलती है.लेकिन क्या कभी सोचा है कि आखिर नक्सलियों के पास हाई टेक विदेशी  हथियार और  पैसा कौन पहुंचाता है.जिससे वह अपने संगठन को मज़बूत करते है.यह सवाल देश की सर्वोच्च सदन लोकसभा में भी गूंजा है.और सांसद ने पूछा की नक्सल खत्म होने चाहिए लेकिन यह भी जाँच हो की आखिर हथियार और पैसा कौन देता है.भारत निर्मित तो छोड़िए विदेशी हथियार नक्सलियो के पास कैसे पहुंचता है.

    दरअसल कई बार जब मुठभेड़ हुई उसमें जब सामान बरामद किये गए तो यह खुलासे हुए कि नक्सलियों के पास अमेरिकन और जर्मन  की बनी हाई तक  हथियार है. नक्सलियों के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर और बीजापुर में मुठभेड़ हुई.जिसके बाद हथियार बरमाद  हुए जिसे देख कर सुरक्षा बल के जवान  भी चौक गए थे इनके पास अमेरिकन  और जर्मन हथियार बरामद किये गए.   

    हथियार US आर्मी के द्वारा इस्तेमाल किया जाता था.जिससे एक बार में 20  राउंड गोली चलती थी.बताया जाता है कि जर्मन और US मेड हथियार का इस्तेमाल दूसरे विश्व युद्ध के दौरान सैनिको ने किया था.जिसकी रेंज 300 गज से अधीकक है।इस गण की जाँच तेज की गयी.लेकिन इसे बरामद होने के बाद सुरक्षा बल के जवान और भी अलर्ट हो गए.कैसे नक्सली घातक हथियार से जंगल में वार कर रहे है.लेकिन दूसरी ओर इस मामले की जानकारी भारत सरकार को दी गयी.

    जिसके बाद विदेशी हथियार के नेटवर्क को खंगलाने में लगी.खुद तत्कालीन  गृह मंत्री पी चितम्बरम ने कहा था की नक्सलवाद देश के लिए एक खतरना खतरा है.जितना देश के बहार आतंवादी से से लड़ रहे है कुछ उसी तरह से देश के अंदर शास्त्र आंदोलन कर रहे माओवादी भी खतरा बनते जा रहे है.उन्होंने यह भी दावा किया कि म्यांमार,नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते विदेशी हथियार पहुँचाया जाता है.साथ ही कई विदेशी ताकत है जो नक्सल के खिलाफ अभियान को गलत बताने में लगे है.     

    ऐसे इस बयान को देखने के बाद यह तस्वीर तो साफ़ हुई की हथियार विदेश से पहुँचता है और इसके बदले नक्सली कई तरह ही मदद उन्हें करते है.इनके पास पैसे का पहला श्रोत लेवी है और दूसरा जंगल में अफीम की खेती कर उसे विदेश के बाजार तक पहुंचाने का काम भी कई बार किया गया.औरविदेश गई नशे की खेप के मिले पैसे का इस्तेमाल भी हथियार के लिए किया जाता है.

    अब हालत बदल गए नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान चल रहा है जिनमें उनका खात्मा हो जाये।लेकिन अभी भी जंगल में हथियार बंद दस्ता घूम रहा है जो खुद लोकतांत्रित देश में अपनी समान्तर व्यवस्था चलाने की चाहत रखे है.इस अभियान के बिच ही लोकसभा के बजट सत्र के दौरान राजस्थान के लोकसभा संसद राज कुमार रोत  ने पूछा की आखिर नक्सलियों के खिलाफ अभियान चल रहा है वह खत्म हो जायेंगे लेकिन हथियार और पैसा कैसे पहुंचता है इसपर भी जाँच होनी चाहिए।


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