एक ताना… और रचा इतिहास ! Ratan Tata ने ठुकराने वालों को ऐसे दिया जवाब

    एक ताना… और रचा इतिहास ! Ratan Tata ने ठुकराने वालों को ऐसे दिया जवाब

    टीएनपी डेस्क TNP DESK):देश के दिग्गज उद्योगपतियों में Ratan Tata का नाम कौन नहीं जानता.वह एक सफल बिजनेसमैन होने के साथ-साथ एक ऐसे इंसान भी है, जो लोगों के दिल में बसते है. रतन टाटा को एक ऐसे व्यवसायी के रूप में जाना जाता है, जो बड़े उद्योगपति होने के बावजूद आम लोगों से जुड़े रहते थे. कहा जाता है कि वे कर्मचारियों और मजदूरों के दुख-दर्द को समझते थे और किसी भी विपदा के समय मदद के लिए आगे आते थे.Tata Steel को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है उन्होंने सिर्फ कंपनी के मुनाफे पर ही नहीं, बल्कि उसके मूल्यों और इंसानियत को भी हमेशा प्राथमिकता दी. रतन टाटा की सफलता से जुड़ी कई प्रेरणादायक कहानियां है, जिनसे हमें सीख मिलती हैआज हम ऐसी ही एक कहानी के बारे में बात कर रहे है, जहां एक ताने ने उन्हें और मजबूत बना दिया.

    काफ़ी प्रेरणादायक है रतन टाटा की ये कहानी

    दरअसल, यह किस्सा 1990 के दशक का बताया जाता है, जब Tata Motors घाटे में चल रही थी.उस समय रतन टाटा ने कंपनी को बेचने का विचार किया और इसी सिलसिले में वे Ford Motor Company के पास पहुंचे.बताया जाता है कि मीटिंग के दौरान फोर्ड के एक अधिकारी ने उनसे कहा कि “जब कार बनानी नहीं आती, तो इस बिजनेस में क्यों आए?” यह बात रतन टाटा को काफी चुभ गई लेकिन उन्होंने इस ताने को नकारात्मक रूप से लेने के बजाय एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया उन्होंने कंपनी को न बेचने का फैसला किया और चुपचाप भारत लौट आए.इसके बाद उन्होंने पूरी मेहनत और लगन के साथ अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने में जुट गए.लगातार प्रयासों के बाद टाटा मोटर्स धीरे-धीरे मुनाफे में आने लगी और एक मजबूत ऑटोमोबाइल कंपनी बन गई.

    बिना कुछ कहे दिया करारा जवाब

    समय ने करवट ली और एक ऐसा दौर आया जब फोर्ड कंपनी खुद आर्थिक संकट में आ गई.तब फोर्ड ने अपने प्रीमियम ब्रांड Jaguar Land Rover को बेचने का फैसला किया. उस समय रतन टाटा ने बिना कोई ताना दिए, उस कंपनी को खरीद लिया.रतन टाटा ने अपनी सहनशीलता, धैर्य और मेहनत से ऐसा करारा जवाब दिया, जिसके लिए उन्हें शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ी. यह कहानी हमें सिखाती है कि अपमान का सबसे अच्छा जवाब सफलता होती है.



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